सोमवार, 12 दिसंबर 2016

इंडिया ई पे क्यों?

         नोटबंदी के बाद से जोर-शोर से देश को कैशलैस ईकोनाॅमी बनाने की बात चली, थोड़ा मुश्किल लगा परिणामस्वरूप कैश-लैस को बदलकर लैस-कैश का लक्ष्य तय किया गया। निश्चित रूप से भारत जैसे देश में जहां की अधिकांश जनता अब भी अपने सारे कार्य नकदी के माध्यम से ही करती है मुश्किल कार्य है, लेकिन असंभव कतई नहीं।
        आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन मार्केट बन चुका है,
एक अध्ययन के अनुुसार 2017 के अंत तक भारत में 314 मिलियन मोबाइल इंटरनेट यूजर्स होंगे और 2021 तक यह आंकड़ा 500 मिलियन के आसपास होगा।

         युवा पीढ़ी के साथ-साथ प्रगतिवादी बुजर्गाें को वर्तमान समय में चाव से स्मार्टफोन और इंटरनेट का प्रयोग करते देखा जा सकता है। ऐसे में जब बात आती है नकदी रहित लेन-देन की तो परिणाम उतने उत्साहजनक क्यों नहीं आते?
    इसके कई कारण हैं। जागरूकता का अभाव, क्यों? कैसे? कहां? जैसे सवाल? साथ ही सबसे बड़ा सवाल इसमें मेरा पैसा सुरक्षित तो रहेगा न?
       सबसे बडी आवश्यकता यह है कि लोगों को डिजिटल लेन-देन के फायदों, तरीकों और सुुरक्षा उपायों के बारे में उन्हीें की मातृभाषा में जागरूक किया जाये। उनकी मदद के लिये उन्हीं के बीच के युवाओं को तैयार किया जाये।
        डिजिटल लेन-देन के तौर तरीकों, सुरक्षा उपायों, बाजार में उपलब्ध विभिन्न निजी कंपनियों के ई वाॅलेटों, विभिन्न बैंकों द्वारा जारी किये गये ई वाॅलेटों, नेट बैकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड के उपयोग आदि जैसी ढेरों जानकारी एक स्थान पर बिना किसी शुल्क के और वह भी मातृभाषा हिंदी में उपलब्ध कराने का एक विनम्र प्रयास है इंडियाईपे
      आशा है आपको हमारा यह प्रयास पसंद आयेगा। आपके सुझाव और सहयोग अपेक्षित है। डिजिटल लेने-देन से संबंधित लेखों, जन उपयोगी सूचनायें भी आप हमें भेज सकते हैं। आपके लेखों और सूचनाओं को हम इंडिया ईपे के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
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