बुधवार, 21 दिसंबर 2016

नकद में अब नहीं मिलेगा वेतन : अध्यादेश मंजूर

     
डिजिटल इंडिया और कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने एक अहम फैसला लेते हुए 'पेमेंट ऑफ वेजेस' अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। इस अध्यादेश के लागू होने के बाद 10 से ज्यादा कर्मचारी रखने वाली कंपनी को अपने कर्मचारियों को वेतन चेक या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से देना अनिवार्य हो जाएगा।
      सरकार की ओर से से पिछले दिनों "पेमेंट ऑफ वेजेस" का बिल रखा गया था. संसद सत्र में नोटबंदी को लेकर हुए विरोध के चलते इस कानून को पास नहीं किया जा सका था और मजबूरी में सरकार को अध्यादेश का सहारा लेना पड़ा. अब नियम के मुताबिक सरकार को छह महीने में अध्यादेश को संसद से पारित कराना होगा.
      बता दें कि अध्यादेश छह महीने के लिये ही वैध होता है. सरकार को इस अवधि में इसे संसद में पारित कराना होता है. वेतन भुगतान (संशोधन) विधेयक 2016 में मूल कानून की धारा छह में संशोधन किया गया है ताकि नियोक्ता अपने कर्मचारियों को वेतन चैक या इलेक्ट्रॉनिक रूप से सीधे उनके बैंक खातों में भेज सके.

जानिए इस अध्यादेश से जुड़ी दस बातें: 
  1. पेमेंट ऑफ वेजेस अध्यादेश के तहत नियोक्ता अब अपने कर्मचारियों को नगद तनख़्वाह नहीं दे पाएंगे. हालांकि, ये एग्ज़िक्यूटिव आदेश सिर्फ़ केंद्र सरकार के संस्थानों पर लागू होगा
  2. राज्यों में स्थानीय रूप से प्रशासित संस्थानों पर इस अध्यादेश का तब तक कोई असर नहीं होगा, जब तक वो इसी तरह के उपाय नहीं करते, क्योंकि श्रम का मुद्दा समवर्ती सूची में आता है.
  3. सरकार को उम्मीद है कि इस क़दम से औद्योगिक सेक्टर और दूसरे संस्थानों को कैशलेस बनाने की सरकार की कोशिशों को बल मिलेगा, जो नोटबंदी के बाद डिजिटल बनने पर ज़ोर दे रही है.
  4. फिलहाल संगठित क्षेत्र का बड़ा तबके को वेतन चेक या खाते में इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफ़र से नहीं मिलता. कारखानों, चाय बाग़ानों और कंस्ट्रक्शन कंपनियों में कई कर्मचारियों को तनख़्वाह नगदी में मिलती है.
  5. आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, केरल और हरियाणा जैसे देश के कुछ राज्यों में संस्थान वेतन पहले से ही चेक या सीधे खाते में भेज रहे हैं. हालांकि, ऐसा कर्मचारियों की लिखित रज़ामंदी के बाद किया जा रहा है.
  6. इससे जुड़ा विधेयक 15 दिसंबर, 2016 को लोकसभा में पेश किया गया था. इसे अगले साल बजट सत्र में पेश किया जा सकता था. लेकिन दो महीने इंतज़ार करने के बजाय सरकार ने अध्यादेश पारित करने का विकल्प चुना.
  7. इसका एक उद्देश्य कर्मचारियों की गलत संख्या बताने वाली कंपनियों पर लगाम कसना भी है. कई कंपनियां अपने कर्मचारियों की सही संख्या नहीं बताती और इस कदम से सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने की उम्मीद बांधी जा रही है.
  8. सरकार नए नियमों को तुरंत लागू कराने के लिए अध्यादेश का रास्ता अपनाती है. कोई भी अध्यादेश जारी होने के छह महीने तक प्रभावी रहता है. सरकार को इतनी मियाद में इसे संसद से पारित कराना होता है.
  9. हालांकि, ये भी कहा जा रहा है कि नगदी से भुगतान करने पर पूरी तरह कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है और नियोक्ता के पास चेक या ई पेमेंट के अलावा कैश में भी वेतन दे सकता है.
  10. सरकार का दावा है कि इस कदम से ना केवल डिजिटल बनने में मदद मिलेगी, बल्कि उन कर्मचारियों के हित भी सुरक्षित रहेंगे, जिन्हें नियोक्ता काफ़ी तंग करते हैं.
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