मंगलवार, 3 जनवरी 2017

2030 तक भारत होगा दुनिया के टॉप 3 देशों में

     कल के निवेश के लिए जरूरी है कि हम आज ही अपने लोगों और इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाएं, हमें जरूरत है कि ऐसी तकनीक पर जोर दें जिससे हमारे विकास को फायदा मिले। हमें ऐसी तकनीक का लाभ उठाने के लिए तैयार रहने की जरूरत है। सरकार विभिन्न क्षेत्रों में वैज्ञानिक ज्ञान को बढ़ाने और नई खोजों के लिए जरूरी समर्थन के लिए प्रतिबद्ध है। हमारे वैज्ञानिकों की मेहनत और सरकार के प्रोत्साहन से तकनीक के क्षेत्र में 2030 में भारत टॉप 3 देशों में शामिल होगा। 
     यह विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीवेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय में पांच दिनों तक चलने वाले वार्षिक भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए व्यक्त किये। 
        इस अवसर पर भारतीय वैज्ञानिकों की जमकर तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि, " राष्ट्र हमेशा उन वैज्ञानिकों का आभारी रहेगा जो बिना थके लगातार देश को आगे ले जाने के लिए काम में जुटे हैं। उनकी कोशिश हमारे समाज को सशक्त बनाने की होती है। उनके विजन, श्रम और नेतृत्व से समाज सशक्त बनता है।" 
          उन्होंने कहा की हमारी सरकार वैज्ञानिकों और वैज्ञानिक संस्थानों का पूरा सहयोग करेगी। दूसरे देशों के साथ मिलकर तकनीक को आगे बढ़ाने का काम किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि "अटल इनोवेशन मिशन प्रोग्राम" के माध्यम से वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ाया जाएगा। स्थायित्वपूर्ण विकास के लिए प्लास्टिक वेस्ट और इलेक्ट्रिकल वेस्ट के इस्तेमाल पर जोर देना होगा। गांवों में जैविक माध्यम से बिजली बनाने और खाद बनाने के लिए प्लांट लगाए जाएंगे। 
      देश को आगे बढ़ाने के लिए रक्षा तकनीक से लेकर ग्रामीण भारत में वैज्ञानिक गतिविधियों की जरूरत है। स्कूल और कॉलेजों में अच्छी प्रयोगशाला की सुविधा होनी चाहिए। इससे स्कूल के बच्चे भी विज्ञान में योगदान दे सकते हैं और देश के विकास में सहयोग कर सकते हैं।
      तिरूपति में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के 14,000 वैज्ञानिकों और विद्वानों के अलावा अमेरिका, जापान, इजरायल, फ्रांस और बांग्लादेश जैसे विभिन्न देशों के छह नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने भी हिस्सा लिया. 
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरुपति के प्रसिद्ध श्री वेंकटेश्वर मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना भी की. 
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