शुक्रवार, 6 जनवरी 2017

फर्श पर सोने वाले युवक से टेक्नोलॉजी दिग्गज गूगल के CEO बनने तक की कहानी (Success story of Google CEO Sundar Pichai)

     आपने बहुत से भारतीयों के बारे में सुना होगा जिन्होंने जमीन से आसमान तक का सफर अपनी मेहनत, लगन और योग्यता के बल पर तय किया है. आज विश्व की कई प्रमुख कंपनियों का शीर्ष नेतृत्व भारतीय प्रतिभाएं संभाल रही है. ऐसी ही एक प्रतिभा है भारत में जन्मे और आई. आई. टी. खरगपुर से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले और वर्तमान में तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी गूगल के CEO सुन्दर पिचाई.
     
 यह बात सुनने में बहुत आसान लगती है कि सुंदर पिचाई Google जैसी बड़ी कंपनी के CEO हैं पर बहुत कम लोग ही हैं जो जानते हैं इस कामयाबी के पीछे कितनी मेहनत और संषर्घ है। चलिए आज जानते हैं "सुन्दर पिचाई" की  फर्श से अर्श तक पहुँचने की सफलता की इस कहानी को
सुन्दर का बचपन
       सुन्दर पिचाई का जन्म 12जुलाई,1972 को मदुरै, तमिलनाडु (Madurai, Tamil Nadu) के निम्न मध्यम वर्ग से सम्बन्ध रखने वाले एक परिवार में हुआ था।  सुंदर के पिता ब्रिटिश कंपनी जीईसी में इंजीनियर थे। उनका परिवार दो कमरों के एक मकान में रहता था। 
उसमें सुंदर की पढ़ाई के लिए कोई अलग कमरा नहीं था। इसलिए वे ड्राइंग रूम के फर्श पर अपने छोटे भाई के साथ सोते थे। घर में न तो टेलीविजन था और न ही कार। 
      उनकी माँ का नाम लक्ष्मी था। वो एक स्टेनोग्राफर थी। उन्होंने अपना स्टेनोग्राफर का काम सुंदर पिचाई के छोटे भाई के जन्म के बाद छोड़ दिया।
क्रिकेट के मैदान में सुन्दर पिचाई
      जब सुंदर पिचाई 12 साल के थे तो उनके पिताजी घर में एक लैंड लाइन फोन घर लेकर आये। उनके जीवन में यह पहली टेक्नोलॉजी से जुडी चीज थी जो पिचाई के घर में आयी थी। सुंदर पिचाई में बहुत ही स्पेशल क्वालिटी/असाधारण ज्ञान था। वो आसानी से अपने टेलीफोन में डायल किये गए सभी नुबरों को याद रख लिया करते थे। सिर्फ फ़ोन नंबर ही नहीं उन्हें हर प्रकार के नंबर आसानी से याद रह जाते थे। पढाई के साथ-साथ वे खेल में भी अच्छे थे। वो अपने स्कूल क्रिकेट टीम के कप्तान भी थे।
       
   एक Cricket Player के रूप में उन्होंने कई मैडल जीते, जिसे देखकर ही इनके मां-बाप को अंदाजा हो गया था कि आगे चलकर उनका बेटा परिवार का नाम रौशन करेगा.
सुन्दर पिचाई का शैक्षिक जीवन
सुन्दर एक मेधावी छात्र थे उनकी मेधा को आगे बढ़ने के लिए उनके इंजीनियर पिता ने बचपन में अपने बेटे के मन में तकनीक के बीज बो दिए थे, शायद इसी का परिणाम था कि  महज 17 साल की उम्र में उन्होंने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा पास कर आईआईटी खड़गपुर में दाखिला ले लिया था.
सुन्दर की शिक्षा के प्रमुख चरण :-
1. सुन्दर पिचाई ने अशोक नगर स्थित जवाहर विद्यालय से दसवीं तक की पढ़ाई की.
2. उससे आगे बारहवीं तक की पढाई उन्होंने चेन्नई के वाना वाणी स्कूल से की.
 3. इसके बाद B. Tech. की पढ़ाई के लिए IIT Kharagpur में दाखिला लिया और "मेटलर्जिकल एंड मैटेरियल साइंस" में डिग्री हासिल की.
 4. इसके बाद आगे की पढाई के लिए सुन्दर पिचाई ने विदेश का रुख किया। उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी में अपनी आगे की उच्च शिक्षा प्राप्त की.
हमेशा रहे टॉपर
सुन्दर पिचाई अपने माता-पिता के साथ
   आईआईटी, खड़गपुर से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई (1989-93) के दौरान सुंदर हमेशा अपने बैच के टॉपर रहे। आईआईटी में सुंदर को पढ़ा चुके प्रोफेसर सनत कुमार राय बताते हैं, ‘मेटलर्जिकल एंड मैटेरियल साइंस" की पढ़ाई के दौरान भी सुंदर इलेक्ट्रानिक्स के क्षेत्र में विभिन्न विषयों पर काम कर रहे थे। वह भी उस दौर में जब आईआईटी के पाठ्यक्रम में इलेक्ट्रानिक्स था ही नहीं।‘ तब भी सुंदर का पहला प्यार तो इलेक्ट्रानिक्स ही था। आईआईटी के नेहरू हाल छात्रावास में रहने वाले सुंदर को याद करते हुए प्रोफेसर राय कहते हैं कि सुंदर बेहद सभ्य, विनम्र और मृदुभाषी हैं। 
करियर की शुरुआत:
      अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद सुन्दर पिचाई ने ‘एप्लाइड मैटेरियल्स’ में इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट मैनेजमेंट में कार्य किया। 
उसके पश्चात उन्होंने मैकिंसे एंड कंपनी (McKinsey & Company) में मैनेजमेंट कंसल्टिंग में कार्य किया।
और गूगल ने बदल दी जिंदगी
     वर्ष 2004 में गूगल ज्वाइन करने के बाद अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर सुन्दर पिचाई दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करते हुए शिखर तक पहुँच गए.
गूगल में सुन्दर का सफरनामा
  • सुंदर पिचाई 2004 में Google से जुड़े। शुरू-शुरू में उन्होंने एक छोटे से टीम के साथ Google Search Tool Bar के ऊपर काम किया। इस Toolbar की मदद से आज के दिन में भी लोग Internet Explorer, Firefox में Google Search कर पा रहे हैं।
  • उन्होंने Google के उत्पाद जैसे Google Gear और Google Pack पर भी काम किया। Google Toolbar के सफल होने के बाद सुंदर पिचाई के मन में एक नया आईडिया आया वो था खुद का इन्टरनेट ब्राउज़र बनाने का। उस समय के Google के CEO "Eric Schmidt" नें खुद के इन्टरनेट ब्राउज़र बनाने की बात को बहुत ही महंगा प्रोजेक्ट करार दिया और मना किया।
  • लेकिन उनके मना करने के बाद भी पिचाई ने इस बात को ठान लिया और गूगल के संस्थापकों लैरी  पेज और सेर्गे ब्रिन को इस बात के लिए राज़ी कर लिया। वर्ष 2008 में Google ने सुंदर पिचाई की मदद से खुद का वेब ब्राउज़र लांच किये जिसका नाम दिया गया "क्रोम"। 
  • Google Chrome बहुत ही अच्छी तरीके से सफल हुआ क्योंकि इससे Google Search लोग Diectly इस्तेमाल कर सकते हैं। आज के दिन में गूगल क्रोम दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किये जाने वाला वेब ब्राउज़र हैं।
  • उसी वर्ष 2008 में सुंदर पिचाई का वाईस प्रेसिडेंट ऑफ़ प्रोडक्ट डेवलपमेंट के रूप में प्रमोशन किया गया। इस पोजीशन पर आते ही सुंदर पिचाई और भी मेहनत करने लगे और 2012 में वो Chrome और Apps के सीनियर वाईस प्रेसिडेंट बन गए।
  • एंड्राइड को बनाने वाले, एंडी रुबिन ने 2013 में किसी दुसरे प्रोजेक्ट के कारण Andoid के प्रोजेक्ट को छोड़ दिया। इसके बाद लैरी पेज नें पिचाई को एंड्राइड का इन-चार्ज बना दिया। बाद अक्टूबर 2014 में उन्हें प्रोडक्ट चीफ बना दिया गया।
  • 10 अगस्त 2015 को सुंदर पिचाई को गूगल के CEO के रूप में घोषित किया गया।

सुन्दर पिचाई का व्यक्तिगत जीवन
       
सुन्दर और उनकी पत्नी अंजलि
   सुन्दर ने आई. आई. टी. खरगपुर के अपनी सहपाठी (classmate) रही अंजलि से विवाह किया है, उनकी पत्नी अंजलि राजस्थान के कोटा शहर की रहने वाली हैं.
      अभी हाल ही में आई. आई. टी. खरगपुर आये सुन्दर ने परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि, "उस समय मोबाइल और स्मार्ट फ़ोन न होने के कारन प्यार करना भी बड़ा मुश्किल था. उन्होंने कहा जब मुझे अंजलि से मिलना होता था तो उसके होस्टल जाकर किसी से बुलाने के लिए कहना पड़ता था, और बुलाने वाला जोर से चिल्लाता था, "अंजलि ! सुन्दर आया है!"
माता पिता को दिया तोहफा 
अपनी सफलता के बाद सुन्दर पिचाई ने अपने माता-पिता के लिए अभी हाल ही में चेन्नई में करोड़ों की लागत वाला एक मकान खरीदा है।
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