रविवार, 29 जनवरी 2017

स्टूडेंट्स के लिए मोदी सर के टिप्स!

       प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने रेडियो कार्यक्रम "मन की बात" में छात्रों को परीक्षा में सफलता के लिए टिप्स दिए. देशवासियों और विशेषकर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए  प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब आप खुश होते हैं तो रिलेक्स महसूस करते हैं जिससे वर्षो पुरानी बातें भी सहज रूप से याद आ जाती हैं।          
   प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रफुल्लित मस्तिष्क ही अच्छे अंक लाने की कुंजी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को परीक्षा के मनोवैज्ञानिक दबाव से बाहर निकलना चाहिए।
दिए उदाहरण :
       सफल लोंगो का उद्धरण देते हुए उन्होंने कहा की देश के पूर्व राष्ट्रपति और महँ वैज्ञानिक कलाम वायुसेना में भर्ती होने गए, फेल हो गए। अगर वे विफलता के कारण मायूस हो जाते तो क्या भारत को इतना बड़े वैज्ञानिक व राष्ट्रपति मिलते। 
        इसी तरह क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को प्रतिस्पद्र्धा छोड़कर अनुस्पर्धा अपनाने का आह्वान भी किया। पीएम ने कहा कि हमें दूसरों से नहीं बल्कि स्वयं से स्पर्धा करनी चाहिए। 
  मोदी ने कहा कि प्रतिस्पद्र्धा पराजय, हताशा, निराशा और ईष्र्या को जन्म देती है जबकि अनुस्पद्र्धा आत्ममंथन, आत्मचिंतन का कारण बनती है और संकल्प शक्ति को मजबूत करती है। 
नक़ल से मिलती है विफलता
      प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को परीक्षा में सफल होने के लिए नकल न करने की हिदायत भी दी। पीएम ने कहा कि नकल जीवन को विफल बनाने के रास्ते की ओर ले जाती है। एक बार नकल की आदत लग जाती है तो जीवन में कभी कुछ सीखने की इच्छा नहीं रहेगी। ऐसे में विद्यार्थी कहां पहुंच पाएंगे। 
खेले कूदें और खुश रहें 
      प्रधानमंत्री ने परीक्षा के दिनों में बच्चों को खेलने, कूदने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि परीक्षा के लिए पर्याप्त आराम, नींद और शारीरिक गतिविधियां होनी चाहिए। परीक्षा को लेकर तनाव न पालें.
विद्यार्थियों के लिए मोदी सर के कुछ और खास टिप्स: 
  • आपने खेल जगत में देखा होगा. क्योंकि उसमें तुरंत समझ आता है, इसलिए मैं खेल जगत का उदहारण देता हूं. जीवन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धा काम आती है. जब मैं इसकी बात कहता हू, तो उसका मतलब है, स्वयं से स्पर्द्धा करना.
  • किताबों के बाहर भी एक ज़िन्दगी होती है. वो बहुत विशाल होती है. उसको जीने का सीखने का यही समय होता है. ‘प्रतिस्पर्द्धा’ एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक लड़ाई है. सचमुच में, जीवन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्द्धा काम नहीं आती है.
  • किसी वकील के पास जाते हैं, तो क्या उस वकील की मार्कशीट देखते हैं? आप उसके अनुभव को, उसके ज्ञान को, उसकी सफलता की यात्रा को देखते हैं. आप में से कोई ऐसा नहीं होगा, जिसने अपने फैमिली डॉक्टर को कभी, वे कितने नंबर से पास हुए थे, पूछा होगा. किसी ने नहीं पूछा होगा.
  • जीवन में आपको नॉलेज काम आने वाला है, स्किल काम आने वाली है, आत्मविश्वास काम आने वाला है, संकल्पशक्ति काम आने वाली है. मार्क और मार्कशीट का एक सीमित उपयोग है. ज़िंदगी में वही सब कुछ नहीं होता है.
  • जब टेंशन होती है, तब आपका नॉलेज, आपका ज्ञान, आपकी जानकारी नीचे दब जाती हैं और आपका टेंशन उस पर सवार हो जाता है. आपको ये पता होना चाहिए, मेमोरी को रिकॉल करने का जो पावर है, वो रिलेक्सेशन में सबसे ज़्यादा होता है.
  • जितनी ज़्यादा ख़ुशी से इस समय को बिताओगे, उतने ही ज़्यादा नंबर पाओगे, करके देखिए. हम सब का दायित्व है कि इन तीन-चार महीनों को अपने-अपने तरीक़े से, अपनी-अपनी परंपरा और परिवार के वातावरण को लेते हुए, उत्सव में परिवर्तित करें.
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