सोमवार, 30 जनवरी 2017

प्लास्टिक आधार कार्ड जैसी कोई अवधारणा नहीं, कागज पर छपा आधार है पूरी तरह वैध

      आधार की अनिवार्यता के चलते कई एजेंसियों और लोंगो ने आधार को प्लास्टिक कार्ड के रूप में प्रिंट करने का एक व्यापार स्टार्ट कर दिया है. 
        ऐसे में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने 50 से 200 रुपए लेकर प्लास्टिक आधार कार्ड देने वाली इकाइयों को आगाह किया है। प्राधिकरण ने जोर देकर कहा कि कागज पर छपा आधार पूरी तरह वैध है और स्मार्ट या प्लास्टिक कार्ड जैसी कोई धारणा नहीं है। 
     यूआईडीएआई ने लोगों को इस झांसे में नहीं पडऩे को लेकर आगाह करते हुए कहा कि आधार का कटा हुआ हिस्सा या साधारण कागज पर डाउनलोड किया गया आधार हर प्रकार के उपयोग के लिए पूरी तरह वैध है।
        यूआईडीएआई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अजय भूषण पांडे ने एक बयान में कहा कि साधारण कागज पर आधार कार्ड या डाउनलोड किया हुआ आधार हर प्रकार के उपयोग के लिए पूरी तरह वैध है। अगर किसी व्यक्ति के पास कागज आधार कार्ड है तो उसे अपने आधार कार्ड को लैमिनेटेड या पैसा देकर प्लास्टिक आधार कार्ड या तथाकथित स्मार्ट आधार कार्ड लेने की कोई आवश्यकता नहीं है।
    स्मार्ट कार्ड या प्लास्टिक आधार कार्ड की इसमें कोई धारणा नहीं है। उन्होंने आधार कार्ड रखने वालों से अपनी निजता का संरक्षण करने को कहा साथ ही यूआईडीएआई ने इसको लेकर अनाधिकृत एजेंसियों को भी आगाह किया है। 
       उन्होंने इन अनाधिकृत एजेंसियों से कहा है कि वह आम जनता से आधार की सूचनायें नहीं जुटाएं। इस तरह की सूचना जुटाना, आधार कार्ड का बिना अनुमति प्रकाशन करना और इस तरह के लोगों को किसी भी तरह मदद पहुंचाना भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध है। यह आधार कानून 2016 के अध्याय छह के तहत भी अपराध है। 
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