सोमवार, 30 जनवरी 2017

ई वॉलेट करते हैं प्रयोग? तो यह खबर आपके बहुत काम की है

      नोटबंदी के बाद उपजी कैश की किल्लत के कारण लाखों लोंगो ने वैकल्पिक उपाय तलाशे जिनमे ई वॉलेट का प्रयोग सबसे प्रमुख रहा. नोटबंदी के कारण कभी लगभग गुमनाम सी कंपनी पेटीएम रातों रात चमक उठी और उसका बिज़नेस कई गुना तेजी से बढ़ने लगा. लेकिन आज भी लोंगो में ई पेमेंट को लेकर भय व्याप्त है, क्योंकि उन्हें लगता है की इसमें धोखाधड़ी करके हैकर्स उनकी गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ कर सकते हैं. 
       
 पर अब सरकार लोंगो को इस भय से सुरक्षा देने जा रही है. सरकार मोबाइल वॉलेट से लेन-देन करने वालों के लिए उनके ई वालेट में जमा धनराशि पर बीमा का प्रावधान बनाने पर विचार कर रही है। ताकि किसी धोखाधड़ी की स्थिति में ग्राहक को उसके नुकसान की भरपाई की जा सके.
         सरकार ने वॉलेट और बीमा कंपनियों से बात शुरु कर दी है। सरकार साथ ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के लिये पंजीकृत जांचकर्ताओं के रूप में अपराध विज्ञान शोधशालाओं को अधिसूचित करने की तैयारी कर रही है। अभी सूचना एवं प्रधौगिकी मंत्रालय साइबर अपराध संबंधित साक्ष्यों के लिये एकमात्र पंजीकृत जांचकर्ता है। 
          मंत्रालय का प्रत्येक जिले में इस प्रकार की एक रिसर्च लैब अधिसूचित करने का इरादा है, 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में इसके बारे में सरकार कुछ ऐलान कर सकती है। गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद भारी तादात में लोगों ने मोबाइल और ऑनलाइन वॉलेट के जरिए लेन-देन शुरू कर दिया है।
       सरकार भी चाहती है कि देश कैशलेस ट्रांजेक्‍शन पर जोर दे। इसको प्रोत्साहित करने के लिए सरकार तरह-तरह के उपाय कर रही है। लेकिन मोबाइल वॉलेट में मौजूद पैसे की सुरक्षा के ऊपर प्रश्नचिन्ह की बजह से लोग इसका प्रयोग करने में कतराते हैं, संभव है की इस उपाय के बाद लोंगो में ई वॉलेट को लेकर असुरक्षा की भावना कुछ कम हो. 
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