रविवार, 26 फ़रवरी 2017

क्या है भीम एप्प? कैसे प्रयोग करें भीम : पूरी जानकारी

       नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए लांच किये गए भीम ऐप ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा है कि BHIM ऐप को 1.70 करोड़ बार डाउनलोड किया गया है जो कि अपने आप में एक विश्व रेकॉर्ड है।
     मोदी सरकार द्वारा 30 दिसंबर 2016 को लॉन्च किए गए BHIM (भारत इंटरफेस फॉर मनी) ऐप का उद्देश्य डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देना था। इस ऐप की सबसे खास बात यह है कि इसे इंटरनेट न होने पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। फोन से USSD कोड *99# डायल करके भी इस ऐप को ऑपरेट किया जा सकता है। भीम को नैशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने डिवेलप किया है। अमिताभ कांत ने कहा, 'यह ऐप बहुत सफल रहा है। यह बहुत अच्छा काम कर रहा है।'
        लांच होने के बाद से ही ज्यादा से ज्यादा यूज़र्स द्वारा भीम एप का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में यह भारत का सबसे ज्यादा लोकप्रिय मोबाइल एप बन गया है। लॉन्चिंग के एक महीने में ही भीम ऐप को ऐंड्रॉयड प्लैटफॉर्म पर 50 लाख (5 मिलियन) से अधिक बार डाउनलोड किया गया था। 
         नोटबंदी के बाद बनी नकदी किल्लत की परिस्थिति का सबसे ज्यादा फायदा पेटीएम ने उठाया, पर भीम एप एक आने के बाद से इस एप की ओर से पेटीएम को भी कड़ी चुनौती मिल रही है. 
         इस ऐप के द्वारा पैसे भेजने के लिए लोगों को सिर्फ एक बार अपना बैंक अकाउंट नंबर रजिस्टर करना होता है और फिर एक यूपीआई पिनकोड जनरेट करना होता है। इसके बाद आपका मोबाइल नंबर ही पेमेंट अड्रेस बन जाता है।       (भीम एप्प को डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें।)
आइए आज जानते हैं भीम को प्रयोग करने की पूरी जानकारी :-
सबसे पहले ऊपर दिए गए लिंक पर क्लिक करके अथवा गूगल प्ले स्टोर से "भीम" (BHIM) एप्प डाउनलोड करें,  आपको सही एप्प ही Install करनी है क्योंकि कई फर्जी एप्प भी प्ले स्टोर पर आ चुकी हैं. 
इंस्टाल करने के बाद जब आप एप्प को ओपन करेंगे तो आपके सामने इस तरह से स्क्रीन आएगी। इसमें अपनी मनपसंद भाषा चुने। 
इसके दो स्टेप बाद आपके सामने इस तरह से स्क्रीन आएगी, ड्यूल सिम या सिंगल सिम मोबाइल सेलेक्ट करें, जिस तरह का भी आपका मोबाइल हो.
अब आपके सामने मोबाइल वेरफिकेशन के लिए इस तरह की स्क्रीन आएगी। नेक्स्ट पर क्लिक करें और जो नंबर आपके बैंक खाते में पंजीकृत है उसे चुन कर वेरिफाई करें।
अब आपका नंबर वेरीफाई हो चुका है
यहाँ पर अपना चार अंकों का पास कोड (पिन नंबर) बनायें।
अब आपके सामने यूपीआई को सपोर्ट करने वाले बैंकों की लिस्ट आएगी, इस लिस्ट में से जिस बैंक में आपका अकाउंट है उसे सेलेक्ट करें।
और यह खुल गया भीम एप्प का इंटरफ़ेस। अब आपकी एप्प आपके उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार है.
अगर आपकी कोई दुकान या व्यावसायिक प्रतिष्ठान है तो आप भुगतान प्राप्त करने के लिए अपना क्यू आर (QR) कोड भी जेनरेट कर सकते हैं। 
    आशा है आपको यह एप्प आपको पसंद आएगी, इसके बारे में और विस्तार से जानने के लिए आप यह विडियो देख सकते हैं.  


शनिवार, 25 फ़रवरी 2017

मोदी सरकार दे रही है आपके कम्प्यूटर और मोबाईल के लिए फ्री एंटीवायरस

        नोटबंदी के बाद जब सरकार ने कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा देने की मुहिम शुरू की तो सबसे बड़ा सवाल निकल कर सामने आया साइबर स्पेस में सुरक्षा का। निश्चित रूप से दिन प्रतिदिन बढ़ती साइबर क्राइम की घटनाओं को देखते हुये डिजिटल लेने-देन के लिये सुरक्षित साबइर स्पेस उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है। 
 वैसे तो मार्केट में कम्प्यूटर और मोबाइल की सुरक्षा के कई एंटीवायरस उपलब्ध कराने वाली कंपनियां है लेकिन इनके ज्यादातर उत्पाद मंहगे है। इसी समस्या को देखते हुये केन्द्र की मोदी सरकार ने ‘‘साइबर स्वच्छता केन्द्र’’ नाम से एक बेबसाइट प्रारम्भ की है।
क्या है साइबर स्वच्छता केन्द्र?
   भारत सरकार द्वारा "डिजिटल इंडिया"अभियान के तहत मिनिस्ट्री ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी ने 'साइबर स्वच्छता केंद्र 'की वेबसाइट लांच की है । इस सेवा का संचालन देश में साइबर सुरक्षा की निगरानी करने वाली संस्था कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सर्ट-इन) के द्वारा किया जायेगा।  इसी बेबसाइट को साइबर स्वच्छता केंद्र नाम दिया गया है ।  
क्या काम है "साइबर सुरक्षा केन्द्र" का?
     यह केंद्र लोगों के पर्सनल कंप्यूटर और मोबाइल फोन जैसे उपकरणों को वायरस और नुकसान पहुंचाने वाले सॉफ्टवेयरों से बचाव के लिए एंटी वायरस उपलब्ध कराएगा।
     साइबर स्वच्छता केन्द्र बेबसाइट के माध्यम से आप अपने मोबाइल और कम्प्यूटर के लिये निःशुल्क सिक्योरिटी टूल्स डाउनलोड कर सकते है और अपने मोबाइल व कम्प्यूटर को किसी तरह के वायरस आदि के हमले से बचा सकते हैं।
कम्प्यूटर या मोबाइल पर वायरस हमले से करेगा सतर्क
     इस केंद्र के जरिए कंप्यूटर एमर्जेसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) वायरस के हमले से पीडि़त सिस्टम से सारी जानकारी लेकर इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों और बैंकों को उपलब्ध कराएगी। इसके बाद इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियां और बैंक अपने ग्राहकों को उनके पीसी या मोबाइल में गड़बड़ी के बारे में सतर्क करेंगे और उस मालवेयर को दूर करने के लिए बोटनेट की वेबसाइट से सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने की सिफारिश करेंगे। ग्राहकों को ये सॉफ्टवेयर मुफ्त में डाउनलोड कर सकेंगे।
    अब तक 58 इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियां और 13 बैंक इस केंद्र के साथ जुड़ चुके हैं। सीईआरटी-इन को जून से पहले नेशनल साइबर कोआर्डिनेशन सेंटर स्थापित करने को कहा है। सरकार ने इस सेंटर के लिए 900 करोड़ रुपये मंजूर किये हैं।
कौन-कौन से साॅफ्टवेयर/टूल्स उपलब्ध हैं?
साइबर स्वच्छता केंद्र के अन्तर्गत निम्न 5 टूल है (Tool provided by Cyber Swachhta kendra )
1. Free Bot Removal Tool.
2. Usb Pratirodh.
3. Appsamvid.
4. Mkavach (mobile devices)
5. Browser Jsguard.
किस टूल का क्या है काम?

फ्री बूट रिमूवल टूल (Free Bot Removal Tool) : 

     यह टूल आपके कम्प्यूटर या लैपटाॅप को सुरक्षित रखने के लिये है, यह टूल 32 बिट और 64 बिट दोनों आॅपरेटिंग सिस्टम को सपोर्ट करता है, इस टूल को आप यहां क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं।
यूएसबी प्रतिरोध  (USB Pratirodh)
     यह टूल आपके कम्प्यूटर या लैपटाॅप में यूएसबी के माध्यम से फैलने वाले वायरस को रोकता है, साथ ही आपके कम्प्यूटर में अनाधिकृत यूएसबी के प्रयोग को भी रोकता है। इसे आप यहां क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं।
एपसम्विद (Appsamvid)
    यह टूल विंडोज आॅपरेटिंग सिस्टम के लिये एक व्हाटलिस्टिंग प्रोग्राम है। इसे आप यहां क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं।
एम-कवच (M-Kavach)
एम-कवच : जैसा कि नाम से ही पता चलता है यह आपके मोबाइल के लिये एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह आपके मोबाइल को मालवेयर, डेटा चोरी, मोबाइल खोने पर डेटा की सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सुरक्षा प्रदान करता है, इसे आप यहां क्लिक करे डाउनलोड कर सकते हैं।
ब्राउजर जेएस गार्ड (Browser JS Guard) 
   यह गूगल क्रोम और फायरफाॅक्स के लिये बनाया गया एक एक्सटेंशन प्रोग्राम है जो आपके इंटरनेट सर्फिंग के दौरान एचटीएमएल और जावास्क्रिप्ट अटैक से सुरक्षा प्रदान करता है। 
गूगल क्रोम के लिये आप इसे यहां क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं।
फायरफाॅक्स के लिये आप इसे यहां से डाउनलोड करें। 

मंगलवार, 21 फ़रवरी 2017

जियो प्राइम ऑफर लांच, 31 मार्च 2018 तक अनलिमिटेड डाटा

        ग्राहकों का आंकड़ा 10 करोड़ पार होने पर रिलायंस जियो ने एक बार फिर आकर्षक ऐलान किए हैं। कंपनी ने जियो प्राइम मेंबरशिप प्लान पेश किया है, जिसके तहत यूजर्स को 303 रुपये प्रति महीने में अनलिमिटेड कॉलिंग और अनलिमिटेड डेटा मिलेगा। खास बात यह है कि 99 रुपये की यह मेंबरशिप मौजूदा 10 करोड़ जियो ग्राहक और 31 मार्च 2017 तक जियो से जुड़ने वाले नए यूजर्स ही ले पाएंगे।
    रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने खास तौर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि जियो पर भरोसा जताने वाले 10 करोड़ ग्राहक एक तरह से जियो के को-फाउंडर हैं। उन्होंने कहा, 'दोस्तो, सरल शब्दों में कहूं तो आपने हमपर विश्वास किया और इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं। अब हमारा यह कर्तव्य है कि जो कोई जियो के साथ है उसे आने वाले दिनों में सबसे अधिक फायदा मिले।'
आइये जानते है कुछ खास बातें : 
  • अब जियो का सिम चलाने के लिए आपको प्राइम मेंबरशिप लेनी होगी। जियो पूरे भारत में कहीं भी कॉल करने का कोई पैसा नहीं लेगी।
  • जियो की प्राइम मेंबरशिप को 1 मार्च से लेकर 31 मार्च के बीच में कभी भी ले सकते हैं। इसके लिए आपको 99 रुपए देने होंगे। यह फीस देने के बाद आप एक साल के लिए जियो के प्राइम मेंबर बन जाएंगे।
  • अगर आप रोमिंग में जाते हैं तो उसका भी आपसे कोई पैसा नहीं लिया जाएगा। किसी भी दिन (जैसे होली, दीपावली, नई ईयर आदि पर) कोई एक्सट्रा चार्ज नहीं लिया जाएगा।
  • जियो प्राइम मेंबर्स को 31 मार्च 2018 तक जियो के हैपी न्यू इयर अनलिमिटेड प्लान वाले बेनिफिट्स मिलते रहेंगे यानी उन्हें अनलिमिटेड डेटा (1GB हाई स्पीड, बाकी 128 kbps) मिलता रहेगा। इसके लिए उन्हें हर महीने सिर्फ 303 रुपये चुकाने होंगे।
  • माइ जियो ऐप, वेबसाइट या फिर स्टोर के जरिए यह मेंबरशिप ली जा सकती है। जियो प्राइम मेंबर्स को वक्त-वक्त पर नए ऑफर्स मिलते रहेंगे। ये ऑफर्स My Jio ऐप के जरिए मिलेंगे।
  • जियो प्राइम मेंबर्स को 10000 रुपये के सालाना वैल्यू वाली जियो के डिजिटल कन्टेंट की मेंबरशिप 31 मार्च 2018 तक फ्री मिलेगी।

सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

कोई भी व्हाट्सएप्प ग्रुप ज्वाइन करें बगैर एडमिन की परमिशन के!

      आजकल दोस्तों, परिवार, सहपाठियों आदि से जुड़ने के साथ-साथ अपने व्यवसाय के प्रमोशन के लिए भी भी लोग जमकर व्हाट्सएप्प का सहारा ले रहे हैं. व्हाट्सएप्प ग्रुप के माध्यम से एक साथ सैकड़ों लोंगो तक अपनी बात पहुचाई जा सकती है. 
  किसी भी व्हाट्सएप्प ग्रुप में जुड़ने के लिए आपको उस ग्रुप के एडमिन के द्वारा ऐड किया जाना जरुरी है या फिर आप किसी ग्रुप में इनवाइट लिंक के माध्यम से भी जुड़ सकते हो. 
  लेकिन आज जो तरीका मैं आपको बताने जा रहा हूँ उसके माध्यम से आप एडमिन की परमिशन और इनवाइट लिंक के बिना ढेर सारे व्हाट्सएप्प ग्रुप से जुड़ सकते हो, तो चलिए शुरू करते हैं :-
सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर पर जाकर "Groups For Whatsapp"  को डाउनलोड कर लें, अब इस एप्प को ओपन करें।
   आपके सामने इस तरह से इसका इंटरफ़ेस ओपन होगा, यहाँ पर आपको व्हाट्सएप्प ग्रुप की विभिन्न केटेगिरी (Arts, Business, Community etc.) दिखाई देंगी। आपको जिस प्रकार के ग्रुप से जुड़ना है उस केटेगरी पर क्लिक करें।
अब आपके सामने उस केटेगिरी से सम्बंधित व्हाट्सएप्प ग्रुप की लिस्ट आ जाएगी, जिस ग्रुप को भी ज्वाइन करना चाहते हैं, उस पर क्लिक करें और ज्वाइन ग्रुप पर जाकर क्लिक करें। 

    क्लिक करते ही आपका व्हाट्सएप्प ओपन हो जायेगा और आपके सामने इस तरह से मैसेज आएगा, यहाँ ग्रुप का नाम, उसके एडमिन का नंबर और ग्रुप में सदस्यों की संख्या भी दिखाई देगी। यहाँ पर यदि आप ग्रुप में शामिल नहीं होना चाहते हैं तो "Cancel" पर जाकर क्लिक कर दें और यदि आपको इस ग्रुप में शामिल होना है तो "Join Group" पर क्लिक कर दें.
       ज्वाइन ग्रुप पर क्लिक करते ही आपके सामने इस तरह से स्क्रीन आएगी, अब आप अपने मनपसंद ग्रुप में शामिल हो चुके हैं. 
     किसी ग्रुप से बाहर जाने के लिए उस ग्रुप पर क्लिक करें और सबसे नीचे दिए गए विकल्प "Exit Group " पर जाकर क्लिक कर दें. 

रविवार, 19 फ़रवरी 2017

बैंक का काम हो तो तुरंत निपटा लें 25 फरवरी से अगले तीन दिन बंद रहेंगे सभी बैंक

     यदि आपका बैंक से संबधित से कोई काम है तो उसे 25 फरबरी से पहले ही निपटा लें क्योंकि फरवरी महीने के आखिरी हफ्ते में लगातार चार दिनों में तीन दिन बैंक बंद रहेंगे। 
   25 से 28 फरवरी के बीच तीन दिन बैंकों में कामकाज नहीं होगा। 25 फरवरी को महीने के चौथे शनिवार के चलते छुट्टी रहेगी, जबकि ठीक अगले दिन रविवार को छुट्टी है। सोमवार यानी 27 तारीख को बैंक खुलेंगे लेकिन ठीक अगले दिन यानी मंगलवार को बैंकों की राष्ट्रीय हड़ताल के चलते बैंक बंद रहेंगे।
क्यों जा रहे हैं हड़ताल पर?
कर्मचारियों का कहना है कि नोटबंदी के दौरान उन्होंने बैंक को जो अतिरिक्त सेवा दी हैं उसका उन्हें अलग से भुगतान मिलना चाहिए मगर अभी तक उन्हें इसका भुगतान नहीं मिला, इन्हीं बकाया पैसों को लेकर कमर्चारी हड़ताल पर जा रहे हैं।

किसी भी मोबाइल के वीडियो, फोटो, फाइलें, मैसेज देखें अपने कम्प्यूटर पर

      अक्सर ऐसा होता है कि हम अपने कम्प्यूटर या लैपटाॅप पर काम कर रहे होते हैं और ऐसे में फोन पर आने वाले मैसेज, फाइल्स आदि देखने के लिये बार-बार हमें फोन भी चेक करना होता है, ऐसे में अक्सर हम सोचते हैं कि काश ऐसा होता कि हम अपने फोन को कम्प्यूटर/लैपटाॅप पर ही एक्सेस कर पाते। इसी तरह जब आप अपना फोन धोखे से घर या आॅफिस पर भूल गये हों और आपको उसमें किसी फाइल की आवश्यकता हो, तब भी ऐसे लगता है कि काश कोई ऐसा तरीका होता जिससे हम दूर से ही अपने फोन की फाइलों तक पहुंच सकते। 
  तो चलिये जानते हैं कि किस तरह से आप अपने स्मार्टफोन को अपने कम्प्यूटर अथवा लैपटाॅप पर एक्सेस कर सकते हैं, और अपने पीसी की स्क्रीन से अपने फोन को कन्ट्रोल कर सकते हैं।
1. सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर पर जाकर ‘‘एयरड्रायड‘‘ एप्प को अपने फोन में इस्टांल कर लें।


2. अब इस एप्प को ओपन करें, आपके सामने इस तरह से तीन आॅप्शन आयेंगे।  एयरड्रायड बेब: यहां पर आप दो तरीके से अपने फोन को पीसी पर एक्सेस कर सकते हैं 
पहला-http://web.airdroid.com एड्रेस टाइप करके
दूसरा : मोबाइल स्क्रीन पर शो हो रहा आईपी एड्रेस टाइप करके
(3-A) आइये सबसे पहले वेब के माध्यम से स्मार्टफोन को पीसी से कनेक्ट करते हैं. अपने इन्टरनेट ब्राउजर में http://web.airdroid.com टाइप करें और एंटर दबाएं। 
(3 A-B & C)


(3-B) अब आपके सामने इस तरह से QR कोड आ जायेगा।
(3-C) अब अपने मोबाइल में "Airdroid" एप्प को ओपन करें और दिये गये विकल्प से क्यूआर कोड को स्कैन करें।

(4)


(4) कोड स्कैन करते ही मोबाइल की स्क्रीन इंटरनेट ब्राउजर में इस तरह से दिखने लगेगी, अब यहां पर आप अपने फोन के वीडियो, फोटो, काॅल लाॅग, काॅन्टेक्ट्स एवं व्हाट्स एप्प आदि देख सकते हैं।
(6)

(5) इसी तरह यदि आप आईपी पते के माध्यम से अपने फोन को कम्प्यूटर / लैपटाॅप से कनेक्ट करना चाहते हैं तो ब्राउजर में अपने मोबाइल स्क्रीन पर शो हो रहे आईपी एड्रेस को टाइप करें और एंटर दबायें। 
(6) एंटर दबाते ही आपके मोबाइल पर इस तरह से एक नोटिफिकेशन आयेगा इसे आप जैसे ही ‘‘एक्सेप्ट‘‘ करेंगे आपको फोन आपके कम्प्यूटर/लैपटाॅप से जुड़ जायेगा।
(7) इसके अलावा यदि आप चाहें तो लाॅग इन आईडी बनाकर इसके माध्यम से अपने मोबाइल को कम्प्यूटर या लैपटाॅप के माध्यम से कंट्रोल/एक्सेस कर सकते हैं। 

यदि आपको इसे समझने में किसी प्रकार की कोई असुविधा हो रही है तो इस वीडियो को देखें।

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017

किसी भी फोटो, वीडियो या फाइल को छुपाएं बिना किसी एप्प के

          स्मार्टफोन वर्तमान में सिर्फ बात करने, इन्टरनेट यूज़ करने, मेसेज भेजने का ही माध्यम नहीं बल्कि अब तो यह मनोरंजन और अपनी तमाम जरुरी फाइलों, फोटोज, विडियो आदि को सहेजने का माध्यम भी बन चुका है, लेकिन अक्सर स्मार्टफोन यूजर्स के सामने एक समस्या आती है अपनी गोपनीय फाइलों, फोटोज, विडियो आदि को दूसरों के नज़रों से छुपाना। क्योंकि आमतौर पर लोंगों को दूसरों का फ़ोन हाथ में आते ही उसकी गैलरी चेक करने की आदत होती है. 
        वैसे तो इस काम के लिए तमाम तरह की एप्प है जिनके माध्यम से आप अपने फ़ोन की गोपनीय फाइलों, विडियो, फोटो आदि को छुपा सकते है या उनको लॉक कर सकते हैं, लेकिन दिक्क तब होती है जब हमारे फ़ोन में नयी एप्प इनस्टॉल करने के लिए स्पेस नहीं होता. 
      आज जो तरीका मैं आपको बताने जा रहा हूं, इसके माध्यम से आप बिना किसी एप्प के अपनी किसी भी फाइल, फोटो, वीडियो आदि को हाइड कर सकते हैं।


आये जानते हैं इस छोटी सी मगर बड़ी काम की ट्रिक के बारे में:-
सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में फाइल मैनेजर को ओपन करें।
जहाँ पर आपको अपनी छुपाई गयी फाइलों को रखना है (फ़ोन या एसडी कार्ड) उसको सेलेक्ट करें, और नीचे दिए गए थ्री डॉट्स (तीन छोटी बिंदुओं) पर क्लिक करके "न्यू फोल्डर" पर क्लिक करें।
अब आपके सामने फोल्डर को नाम देने का विकल्प आयेगा। यहां पर डाॅट लगाकर किसी भी नाम का फोल्डर बना लें। जैसे मैंने यहाँ पर (.myfile) नाम से फोल्डर बनाया है. (ध्यान रखें यदि आपने फोल्डर के नाम से पहले डाॅट नहीं लगाया तो फोल्डर हाइड नहीं होगा।)
यदि बना हुआ फोल्डर नहीं दिख रहा है तो फिर उन्हीं तीन बिन्दुओं पर क्लिक करें और ‘‘Show hidden files’’ पर क्लिक कर दें। अब आपका फोल्डर दिखने लगेगा। अब जिन फाइलों, फोटो या वीडियो को छुपाना चाहते हैं उन्हें कट करके इस फोल्डर मे लाकर पेस्ट कर दें।
पुनः उन्ही थ्री डॉट्स पर क्लिक करके (Hide hidden files) पर क्लिक कर दें. जिन फाइलों, वीडियो या फोटो को आपने इस फोल्डर में रखा है वह गायब हो चुकी है.
(अगर आपको इसे समझने में कोई समस्या है तो हमारे यूट्यूब चैनल पर इस वीडियो को देख सकते हैं.) 

फेसबुक संस्थापक ने कहा सोशल मीडिया का उपयोग मोदी से सीखे दुनिया!

    लोकप्रिय सोशल वेबसाइट फेसबुक के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने अपनी फेसबुक टाइमलाइन पर "Building Global Community" (वैश्विक समुदाय का निर्माण) विषय पर लिखी एक पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए दुनिया को उनसे सीख लेने की सलाह दी है. 
    मार्क जुकरबर्ग ने इस पोस्ट में लिखा कि कैसे आजकल लोग चुनाव खत्म होने के बाद भी अपने नेता से मुद्दों और रोजमर्रा की जरुरतों के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़े रहते हैं. जुकरबर्ग ने ये भी बताया कि कैसे सोशल मीडिया जनता को उनके चुने हुए नेताओं के साथ सीधे संपर्क में रहने में मदद करता है. इससे आगे लिखते हुए मार्क जुकरबर्ग ने नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए बताया कि, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अपने मंत्रियों से फेसबुक पर जानकारी साझा करने की सलाह देते हैं ताकि इससे लोगों को सीधे फीडबैक मिल सके. 
      जुकरबर्ग ने लिखा, ”वोटिंग के बाद सबसे बड़ा मौका यह है कि लोगों को उनके जुड़े मुद्दों के साथ जोड़े रखा जाए ताकि लोग केवल मत डालने तक ही ना सिमट जाएं। हम जनता और चुने गए नेताओं के बीच संवाद और जिम्‍मेदारी कायम कर सकते हैं।
ज़ुकरबर्ग की फेसबुक पोस्ट, पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
         केन्‍या का उदाहरण देते हुए लिखा कि वहां पर गांव के गांव वॉट्सएप ग्रुप पर हैं और उनके जनप्रतिनिधि भी इसमें शामिल हैं। उन्‍होंने लिखा कि फेसबुक पर सबसे ज्‍यादा फॉलो किया जाने वाला aur लोगों से जुड़ा रहने वाला व्‍यक्ति चुनाव में आसानी से जीत दर्ज करता है। इसके लिए उन्‍होंने भारत और इंडोनेशिया का जिक्र किया। 
     फेसबुक के सीईओ ने लिखा, जैसे पुराने समय में लोंगो से जुड़ने, चीजों के बारे में जानने का साधन TV बना था ठीक उसी तरह आज की नयी पीढ़ी के लिए उसकी जगह अब सोशल मीडिया ने ले ली है।

टाटा की कारों में होगी माइक्रोसॉफ्ट की टेक्नोलॉजी

         माइक्रोसॉफ्ट! यह नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है. दुनिया की सबसे बड़ी इस सॉफ्टवेयर कंपनी के बनाये सॉफ्टवेयर पूरी दुनिया में 80 प्रतिशत से ज्यादा कम्प्यूटरों पर इस्तेमाल किये जाते हैं. कम्प्यूटर, लैपटॉप, टेबलेट, एटीएम जैसे उपकरणों को अपनी सॉफ्टवेयर तकनीकी से उन्नत बनाने वाली माइक्रोसॉफ्ट की तकनीक भारतीय कार कंपनी "टाटा मोटर्स" की कारों में भी नज़र आने वाली है. 
    देश को तमाम अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कारें उपलब्ध करने के लिए टाटा मोटर्स ने गुरुवार को माइक्रोसॉफ्ट के साथ करार करने का ऐलान किया है. टाटा मोटर्स ने एक बयान में कहा है कि उसने दुनिया भर में तकनीकी दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के साथ गंठजोड़ किया है. यह करार कार के भीतर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अनुभव में सुधार के लिए किया गया है. 
    यह कंपनी की तरफ से यात्री कार के क्षेत्र में उत्पाद की रणनीति में फेरबदल का हिस्सा है. इससे वह खुद को तकनीकी दिग्गज मसलन गूगल व उबर से मिलने वाली प्रतिस्पर्धा से सुरक्षित कर सकेगी.
          टाटा मोटर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) व एमडी गुंटर बट्सचेक ने कहा कि हम माइक्रोसॉफ्ट की एजर इंटेलिजेंट क्लाउड पर मौजूद कनेक्टेड व्हीकल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे हमारे ग्राहकों को कार में डिजिटल सुविधाएं मिल सकेंगी. 
           कंपनी माइक्रोसॉफ्ट की कनेक्टेड व्हीकल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कृत्रिम बुद्धिमता, मशीन लर्निंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स की क्षमता के साथ करेगी. रेनो-निसान के साथ ऐसी ही साझेदारी के ऐलान के समय माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले साल तकनीकी प्लेटफॉर्म की घोषणा की थी. यह प्लेटफॉर्म माइक्रोसॉफ्ट अजूरे से लैस है और यह एक क्लाउड कंप्यूटिंग सेवा है.
          टोयोटा व फोर्ड समेत अन्य वैश्विक वाहन कंपनियों के साथ भी माइक्रोसॉफ्ट का ऐसा ही गंठजोड़ है, जो तकनीक से लैस नये उत्पादों के विकास के लिए है, लेकिन भारत में टाटा मोटर्स ऐसा करने वाली पहली कंपनी है. माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के अध्यक्ष अनंत माहेश्वरी ने बताया कि हम उम्मीद कर रहे हैं कि साल 2020 तक नयी कारों का 90 फीसदी कनेक्टेड होगा. माहेश्वरी ने कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग तकनीकों का इस्तेमाल कर हम भारत व दुनिया भर के वाहन चालकों को सुरक्षित, उत्पादकता से भरपूर और बेहतर अनुभव उपलब्ध करायेंगे.
          टाटा मोटर्स ने कहा कि बेहतर अनुभव वाला पहला वाहन मार्च, 2017 में जिनेवा इंटरनेशनल मोटर शो में पेश किया जायेगा. कंपनियों ने कुछ विशेषताओं मसलन रेस्तरां, शॉपिंग और मार्ग आदि से संबंधित सुझाव आदि का जिक्र किया, जो चालक के लिए होगा और वह लोकेशन व उनके प्रोफाइल पर निर्भर करेगा. यह प्लेटफॉर्म कार की स्थिति पर समयबद्ध अलर्ट मुहैया करायेगा, ताकि सुनिश्चित हो कि इसका सही तरीके से रखरखाव किया गया है.

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

अब सिम कार्ड की तरह मिलेगा पैन मिनटों में

       पैन कार्ड के लिए अब अब महीनो और दिनों तक इंतजार करने के दिन अब लदने वाले हैं, जिस तरह से आप आधार के जरिये अपना नया सिम हाथो हाथ एक्टिवेट कराते हैं ठीक उसी तरह आप आपको आपका पेन नंबर भी कुछ मिनटों में ही मिल जायेगा। 
     जी हाँ, बहुत जल्द आप कुछ मिनटों में अपना स्थायी खाता संख्या (PAN) प्राप्त कर सकते हैं। इतना ही नहीं, आप अपने स्मार्टफोन से इनकम टैक्स भी पे कर सकेंगे। करदाताओं की जिंदगी आसान बनाने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) आधार ई-केवायसी सुविधा का इस्तेमाल करते हुए रियल टाइम बेसिस पर पैन जारी करने की दिशा में काम कर रहा है। ई-केवायसी से संबंधित व्यक्ति के ऐड्रेस और उसकी व्यक्तिगत जानकारियों की पुष्टि हो जाती है।
       संबधित अधिकारियों का कहना है कि अगर ई-केवायसी के जरिए SIM दिया जा सकता है तो PAN भी जारी किया जा सकता है।' उन्होंने कहा कि इससे पैन जारी होने का वक्त मौजूदा 2-3 सप्ताह से घटकर 5-6 मिनट हो जाएगा। हालांकि, इस प्रक्रिया से नंबर तो तुरंत मिल जाएगा, लेकिन कार्ड बाद में डिलिवर होगा। सीबीडीटी और कंपनी मामलों के मंत्रालय ने नई कंपनियों को एक साझे फॉर्म के जरिए चार घंटों में पैन जारी करने के लिए समझौता किया है। इसके पीछे भी मकसद त्वरित तौर पर पैन जारी करना है जो कंपनियों के लिए व्यवसाय पहचान संख्या भी होगी।
          इसके अलावा, टैक्स डिपार्टमेंट एक ऐप डिवेलप कर रहा है जिससे ऑनलाइन टैक्स पेमेंट में मदद मिलेगी। साथ ही, इस ऐप में पैन के लिए आवेदन करने, अपने रिटर्न की ताजा जानकारी लेने जैसी अन्य सेवाएं भी उपलब्ध होंगी। हालांकि, टैक्स डिपार्टमेंट अपने पोर्टल के जरिए कई सेवाएं ऑनलाइन मुहैया कराता है, फिर भी ऐप डिवेलप करने का मकसद वरिष्ठ नागरिकों के साथ-साथ युवा करदाताओं की जिंदगी आसान बनाना है। सूत्रों के मुताबिक, डायरेक्टरेट ऑफ सिस्टम की देखरेख में सीबीडीटी में दोनों प्रॉजेक्ट्स पर काम चल रहा है।

सोमवार, 13 फ़रवरी 2017

बिक गया भारत का पहला कार ब्रांड "एम्बसेडर"

 किसी ज़माने में भारत में शान ओ शौकत और रुतवे का पर्याय रही भारत की पहली स्वदेशी कार एंबेसडर को हिंदुस्तान मोटर्स ने 80 करोड़ रुपये में फ्रांसीसी कार ब्रांड प्यूजो एसए को बेच दिया है. हिंदुस्तान मोटर्स ने शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कहा है कि इसमें ट्रेडमार्क भी शामिल है. एंबेसडर ब्रांड की बिक्री के लिए प्यूजो एसए से यह सौदा 80 करोड़ रुपये में हुआ है. 
 एंबेसडर कार जो कभी देश के राजनेताओं और अफसरों की पहली पसंद हुआ करती थी, जिसको भारत में कारों का स्टेटस सिंबल माना जाता था और ये "किंग ऑफ इंडियन रोड" के नाम से मशहूर थी. पहले देश के सभी राजनेताओं के पास ये ही कार हुआ करती थी और संसद के बाहर इससे निकलते पीएम और सभी बड़े नेताओं की तस्वीर एंबेसडर की पहचान हुआ करती थी. एंबेसडर भारतीय नेताओं-मंत्रियों की शान की सवारी थी और इसमें नेताओं का सफर शाही सवारी से कम नहीं माना जाता था, आज वही एम्बेसडर ब्रांड कौड़ियों के दाम एक विदेशी कंपनी ने खरीद लिया।
आइये जानते है एम्बेसडर से जुड़े कुछ रोचक तथ्य :- 
  • हिंदुस्‍तान मोटर्स ने एम्बेसडर का निर्माण 1958 में करना शुरू किया था.
  • ये गाड़ी ब्रिटेन के मोरिस ऑक्‍सफोर्ड सीरीज 3 कार के मॉडल की तरह थी.
  • एंबेसडर पहली ऐसी कार थी जिसका निर्माण भारत में किया गया. इसे भारत में स्‍टेटस सिंबल माना जाता था.
  • 1980 के मध्‍य में मारुति सुजुकी के भारत आने के बाद भारतीय बाजार में इसका वर्चस्‍व कम हुआ. मारुति ने मारुति 800 गाड़ी एंबेसडर से कम कीमत पर बाजार में उतारी थी.
  • ब्रिटेन से प्रेरणा लेने के बावजूद एंबेसडर को हमेशा ही इंडियन कार कहा जता रहा है. इसे 'किंग ऑफ इंडियन रोड' का दर्जा भी मिला.
  • टोयटा, फोर्ड जैसी कई विदेशी कंपनियों के बाजार में आ जाने से इसकी लोकप्रियता में गिरावट आनी शुरू हो गयी.
  • घाटे के चलते एम्बेसडर कारों का निर्माण तीन साल पहले ही यानी साल 2014 में बंद कर दिया गया था.
  • एंबेसडर कारों की घटती बिक्री और इस कार की उत्पादन लागत बेतहाशा बढ़ जाने के कारण इसकी मालिक कंपनी हिंदुस्तान मोटर्स ने प्यूजो एसए ग्रुप के साथ अपने ब्रांड और ट्रेडमार्क एंबेसडर को बेचने का समझौता सिर्फ 80 करोड़ में कर दिया.
  • सौदे से मिली रकम से कंपनी के कर्मचारियों और लेनदारों का कर्ज चुकाया जाएगा.

शनिवार, 11 फ़रवरी 2017

घर बैठे भारत सरकार के लिए करिये काम और कमाइए हर माह दस हजार

     आजकल इन्टरनेट की दुनिया में ऑनलाइन इनकम के लिए ढेरों माध्यम हैं लेकिन इन्टरनेट की इसी दुनिया में ठग भी तैयार बैठे हैं जो आपको ऑनलाइन इनकम कराने के नाम पर आपकी कमाई लेकर रफूचक्कर हो जाते हैं.
       इसमें कोई शक नहीं है की अगर आप उचित माध्यम का प्रयोग करें तो आप इन्टरनेट से पैसे कमा सकते हैं, बस जरुरत है सही गलत में फर्क करने की. इन्टरनेट से आमदनी के कई तरीके आपको इंडिया ई पे पर बताये जाते रहे हैं और आगे भी बताये जाते रहेंगे पर आज आपको एक ऐसी अपॉच्‍यूर्निटी के बारे में बता रहे हैं, जिसके जरिए आप घर बैठे भारत सरकार के लिए काम कर सकते हैं, और कमाई भी कर सकते हैं.  
     
भारत को डिजिटल बनाने में जुटी मोदी सरकार ने  "Digitize India" नाम से एक ऐसा इनिशिएटिव शुरू किया है, जिसके जरिए आप न सिर्फ हर महीने 10 हजार रुपए तक कमा सकते हैं, बल्कि इसके जरिए आप राष्‍ट्र निर्माण में अपना योगदान भी दे सकते हैं.
क्या है योजना?
       इस योजना के अन्तर्गत सरकार की ओर से विभिन्न विभागों के दस्तावेजों को डिजिटलाइज किया जा रहा है, इसके अन्तर्गत सरकार द्वारा विभिन्न विभागों के दस्तावेजों को स्कैन कर लिया गया है अब इन फाइलों के कंटेंट को डिजिटल रूप देने के लिए आम लोगों से मदद लेने के अलावा उन्‍हें कमाई का मौका भी दिया जा रहा है। इस योजना में डाटा एंट्री करने वाले लोग काम करके पैसे कमा सकते हैं। इस कार्यक्रम में डाटा एंट्री का काम करने वाले लोगो को डिजिटल कंट्रीब्यूटर कहा जाता है।
कैसे कर सकते हैं यह काम?
    इस योजना में डाटा एंट्री का काम करने का लिए आपको डिजिटाइज़ इंडिया की वेबसाइट पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा। आइये जानते हैं इस वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कैसे करें?
डिजिटल कंट्रीब्यूटर कौन बन सकता है?
कोई भी भारतीय नागरिक जो निम्न शर्तों को पूरा करता हो डिजिटल कंट्रीब्यूटर बन सकता है.
1. कंप्यूटर का सामान्य ज्ञान (आवेदक को कम्प्यूटर की सामान्य जानकारी हो)
2. आधार कार्ड (आवेदक के पास आधार कार्ड हो)
3. बैंक खाता ( जो आधार नंबर से लिंक हो और जिसमें आप पैसे मंगाना चाहते हैं)
4. इन्टरनेट
5. स्मार्ट डिवाइस (जैसे कंप्यूटर, टेबलेट, स्मार्ट फ़ोन आदि)
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
2. यहाँ उपलब्ध फॉर्म में अपना पूरा नाम, जेंडर, जन्मतिथि, आधार नंबर डालें और अपने आधार का वेरिफिकेशन कराएं।
3. इसके बाद अपना यूजर नेम,पासवर्ड, ई मेल आईडी और मोबाइल नम्बर दर्ज करें.
4. अब आपके मोबाइल पर एक ओटीपी का मेसेज आएगा उसे भरे और "Register Now" पर क्लिक करें।
कैसे करनी होगी डाटा एंट्री?
   डिजिटाइज इंडिया पर रजिस्‍टर करने के बाद आपको अपने टास्‍क करने होंगे। इसमें सामान्‍य तौर पर स्निपेट्टस (शब्‍दों को टुकड़ों में तोड़ा जाता है) होते हैं, जो इमेज फाइल के तौर पर आपके सामने आते हैं। इन्‍हें आपको कॉलम में टाइप करना होता है। डिजिटाइज इंडिया की वेबसाइट के मुताबिक सरकारी फाइलों की गोपनीयता को बनाए रखने के लिए फाइल के कंटेंट को स्निपेट्टस में तोड़ दिया जाता है।  टाइप करने के लिए आपके सामने एक-एक शब्‍द आते हैं, जिससे ये काम करना काफी आसान हो जाता है। इन टास्‍क को पूरा करने के लिए आपको रिवॉर्ड प्‍वाइंट्स मिलते हैं।
रिवॉर्ड पॉइंट्स को कैसे करें रिडीम?
      जैसा की आपने पढ़ा की इस वेबसाइट पर कार्य करने पर आपको रिवॉर्ड पॉइंट्स मिलते हैं. रिवॉर्ड प्‍वाइंट्स को रिडीम करने के लिए आपके खाते में कम से कम 2500‍ रिवॉर्ड प्‍वाइंट होने चाहिए। आप इन पॉइंट्स को अपने बैंक अकाउंट में क्रेडिट करा सकते हैं, साथ ही यदि आप चाहें तो इन्‍हें सरकार को डोनेट भी कर सकते हैं। जहां पैसे के तौर पर रिवॉर्ड को रिडीम करने के लिए 2500 रिवॉर्ड प्‍वाइंट्स होने जरूरी हैं। वहीं,  डोनेट करने करने के लिए 1500 रिवॉर्ड पॉइंट्स होने जरुरी है. 

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

जानिए वाई फाई के बारे में कुछ रोचक तथ्य

         एक समय था जब इन्टरनेट के लिए अपने लैपटॉप या कम्प्यूटर को इन्टरनेट केबल से जोड़ना पड़ता था, पर आजकल फोन लाइन के सहारे इंटरनेट बीते जमाने की बात हो गई है आजकल तो वाईफाई का जमाना है, जिसके सहारे बिना किसी तार के इंटरनेट एक्सेस किया जा सकता है.वाई-फाई एक वायरलेस टेक्नोलॉजी है जिसका खासा यूज़ इन्टरनेट से जुड़ने के लिए किया जाता है. 
क्या है वाई फाई?
             वाई-फाई (wi-fi) का फुल नेम वायरलेस वायरलेस फिडेलिटी है. वाई-फाई (अंग्रेज़ी: Wi-Fi) रेडियो तरंगों की मदद से नेटवर्क और इंटरनेट तक पहुँचने की एक तकनीक है। यह वाई-फाई एक्सेस प्वाइंट के एक निश्चित एरिया में मौजूद मोबाइल फोनों/लैपटॉप अथवा अन्य इस तकनीक से उक्त उपकरणों को वायरलैस इंटरनेट उपलब्ध कराने का काम करता है। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी गति (स्पीड) काफी तेज होती है। यह तकनीक आजकल के नए स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्यूटर में आदि में इनबिल्ट होती है। साथ ही अगर आपके कम्प्यूटर में यह तकनीक नहीं है तो भी आप एक छोटी सी डिवाइस का इस्तेमाल कर अपने पुराने कम्प्यूटर को भी वाई-फाई से लैस बना सकते हैं. 
.        आजकल तो लोग अपने स्मार्ट फ़ोन को भी पोर्टेबल वाई फाई हॉटस्पॉट की तरह प्रयोग करके अपने लैपटॉप आदि पर इन्टरनेट का प्रयोग करते हैं. स्मार्ट फ़ोन से पोर्टेबल वाईफाई हॉट स्‍पॉट बनाकर कई सारे डिवाईसो को जोड़ सकते है.इसके लिए सेटिंग में जाये वायरलैस एंड नेटर्वक आप्शन पर क्लिक करे और Portable Wi-Fi hotspot पर चेक मार्क लगा दे ऐसा करते ही आपका मोबाइल राऊटर या ब्रॉडबैंड के तरीके से काम करने लगेगा .
वाई-फाई सिस्टम की कुछ खास बातें
  • यह टेक्नोलॉजी IEEE 802.11 कई स्टैण्डर्ड पर बेस्ड है.
  • ये टेक्नोलॉजी 1999 के बाद आई थी.
  • इसकी स्पीड 11 से 60 MB पर सेकंड है.
  • इसकी रेंज 10 मीटर से लेकर 150 फिट तक है.
  • वाई-फाई सिस्टम के लिए एक्सेस पॉइंट और वाई-फाई कार्ड् की जरुरत होती है.
  • वाई-फाई सिस्टम में एक एक्सेस पॉइंट में 30 से भी अधिक यूजर कनेक्ट हो सकते है.
  • वाई-फाई सिस्टम तीन Typologies पर काम करता है- (i) एक्सेस पॉइंट बेस्ड (ii) पियर टू पियर (iii) पॉइंट टू मल्टीपॉइंट ब्रिज.
  • वाई-फाई सिस्टम में दो प्रकार की सिक्यूरिटी के आप्शन है पहला- यूजर ऑथेंटिकेशन और दूसरा सर्वर ऑथेंटिकेशन
  • वाई-फाई सिस्टम सिक्यूरिटी को तीन लेवल से एक्सेस किया जा सकता है-
  • (i) SSI (ii) WEP (iii) WAP.

वाई-फाई सिस्टम को पासवर्ड प्रोटेक्टेड रखना
      वाई-फाई यूजर्स को अपने वाईफाई कनेक्शन को पासवर्ड प्रोटेक्टेड रखना चाहिए। कभी भी अपने मोबाइल या दूसरे वाई फाई राउटर को बिना पासवर्ड  के नहीं रखना चाहिए, ऐसा करने से कोई भी आपके इन्टरनेट का प्रयोग करके किसी भी प्रकार का गैर क़ानूनी कार्य कर सकता है और पकडे आप जायेगें। इसलिए अपने वाई फाई राउटर को सुरक्षित रखना आपकी स्वयं की जिम्मेदारी है. इसके लिए अपनी डिवाइस को पासवर्ड से प्रोटेक्ट करना है।
ब्लूटूथ और वाई-फाई में क्या अंतर है :-
        ये दोनो वायरलेस टेक्नोलॉजी पर काम करते है. ब्लूटूथ का प्रयोग कम दूरी पर उपकरणों के बीच डाटा ट्रान्सफर करने के लिए होता है. यह लो बैंडविड्थ पर काम करता है जैसे वायरलेस कीबोर्ड, माउस, इयरफोन आदि जो कि वाई-फाई हाई बैंडविड्थ पर काम करता है इसकी डिस्टेंस भी ज्यादा होती है.ब्लूटूथ का बिट रेट 2.1 MBPS होता है जबकि वाई फाई का बिट रेट 600 MBPS होता है.

बुधवार, 8 फ़रवरी 2017

जल्द हटने वाली है नकदी निकासी की सीमा

     नोटबंदी के बाद से नकदी की कमी के कारण लोगों को आ रही परेशानियों के मद्देनजर आरबीआई ने एेलान किया है कि 20 फरवरी से लोग एक हफ्ते में 50 हजार रुपये निकाल पाएंगे और 13 मार्च के बाद नकदी निकालने पर कोई नियम लागू नहीं होगा। यानी आप कितनी भी रकम निकाल पाएंगे। 
       फिलहाल एक हफ्ते में 24 हजार रुपये ही निकाले जा सकते हैं। 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और हजार के नोटों को अमान्य करार दे दिया था और एटीएम से कैश निकासी की सीमा भी तय कर दी थी। उनके इस एेलान के बाद देश के बैकों और एटीएम में कैश की किल्लत हो गई थी। लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ा था। 
         जैसा कि आपको मालूम ही है कि आम लोगों व छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार (30 जनवरी) को एटीएम व चालू खातों से दैनिक नकदी निकासी पर सीमा को समाप्त कर दिया था, लेकिन बचत बैंक खातों से निकासी पर 24000 रुपए की साप्ताहिक सीमा जारी रखी थी।
           केंद्रीय बैंक ने इसके साथ ही वादा किया था कि प्रणाली में नकदी लौटने की गति को ध्यान में रखते हुए वह साप्ताहिक सीमा पर भी भविष्य में फिर से विचार करेगा। केंद्रीय बैंक ने कहा था,‘बाजार में गई नकदी के बैंक में लौटने की गति की समीक्षा करने के बाद पूर्व की स्थिति को आंशिक रूप से बहाल करने का फैसला किया गया है।’ इसके अनुसार एक फरवरी 2017 से एटीएम से नकदी निकासी की दैनिक सीमा नहीं रहेगी। हालांकि बैंकों से अपनी अपनी निकासी सीमा तय करने को कहा गया था जैसा कि वे 8 नवंबर 2016 से पहले कर रहे थे।
    रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर आर. गांधी ने कहा, बैंकों के बचत खातों से नकद निकासी की सीमा फिलहाल बनी रहेगी। नये नोटों के चलन में आने की रफ्तार को देखते हुये निकासी पर लगी सीमा को दो चरणों में हटाने का फैसला किया गया है।
      20 फरवरी से बैंकों के बचत खाते से साप्ताहिक नकद निकासी सीमा 50,000 रपये तक बढ़ा दी जायेगी और उसके बाद 13 मार्च 2017 से बचत खातों से नकद निकासी की कोई सीमा नहीं होगी।
     ये 500 और 2,000 के नकली नोट के बारे में पूछे गये सवाल पर गांधी ने कहा कि हाल ही में जो नकदी नोट पकड़े गये हैं वह असली नोट की फोटोकॉपी थी जिसे आम आदमी भी आसानी से पहचान सकता है। उन्होंने कहा कि नये नोटों में सुरक्षा के कई मानक अपनाये गये हैं जिनकी नकल करना आसान नहीं है। 

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

सब कुछ जानती है फेसबुक आपके बारे में! जानिए कैसे?

      जी हाँ दोस्तों से जुड़ने से लेकर बिज़नेस के प्रमोशन तक के लिए आजकल फेसबुक का प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है. कई लोग तो आजकल पूरे दिन फेसबुक पर ऑनलाइन ही बने रहते हैं, फेसबुक लाइक के चक्कर में कितने लोग अपनी मेहनत की कमाई गवा बैठे यह तो आप आजकल टीवी पर देख ही रहे हैं. 
 निश्चित रूप से फेसबुक हमारे दोस्तों, परिवार और बिज़नेस आदि के दायरे को विस्तृत करती है पर क्या आपने कभी सोचा है की फेसबुक आपकी हर ऑनलाइन गतिविधि को ट्रैक करती है? आप नेट पर क्या सर्च करते हैं, क्या देखते हैं फेसबुक को सब पता रहता है!
      भरोसा न हो तो इलेट्रॉनिक्स के बारे में सर्च करके देखिये फेसबुक आपको इलेट्रॉनिक्स से सम्बंधित विज्ञापन दिखाना शुरू कर देगी। अगर आप सौंदर्य उत्पादों को सर्च करते है तो आपको इससे जुड़े उत्पादों के विज्ञापन दिखने लगेंगे। यानि आप जो ऑनलाइन करते हैं, देखते हैं फेसबुक सबको ट्रैक करती है ताकि आपकी रुचियों, शौकों का पता लगाया जा सके. 
    फेसबुक ज्वाइन करने के साथ ही आप फेसबुक को अपनी ऐक्टिविटी ट्रैक करने की इजाजत दे देते हैं। फेसबुक आपकी ऐक्टिविटी इसलिए ट्रैक करती है, ताकि आपकी पसंद-नापसंद का पता लगाकर उस हिसाब से विज्ञापन दिखाए जा सकें।
कैसे पता लगाती है फेसबुक आपके बारे में?
फेसबुक तीन तरीकों से आपके बारे में जानकारी जुटाती है:
1. जो जानकारी आप सीधे देते हैं। जैसे कि नाम, उम्र, शादी हुई है या नहीं, कहां रहते हैं, कहां काम करते हैं वगैरह।
2. आप फेसबुक पर क्या करते हैं। जैसे कि आपने कौन से पेज लाइक किए हैं, किन ग्रुप्स में आप हैं और किस तरह के फोटो और लिंक आपने शेयर किए हैं या किनपर क्लिक किया है।
3. फेसबुक के अलावा आप बाकी इंटरनेट पर क्या करते हैं। फेसबुक कुकीज़ या इसी तरह की टेक्नॉलजी के जरिए पता लगाती है कि आपने क्या सर्फ किया है। फेसबुक इन कुकीज़ को पढ़कर उस इन्फर्मेशन के हिसाब अपनी और अन्य वेबसाइट्स पर ऐड दिखाती है।
क्या बच सकते हैं इससे ?
    अगर आपको फेसबुक पर विज्ञापनों से मुक्ति चाहिए तो आपको फेसबुक से ही मुक्ति पानी होगी। फिर भी आप यह तय कर सकते है कि फेसबुक आपको क्या-क्या ऐड दिखाए। इसके अलावा आप बाकी इंटरनेट पर क्या करते हैं, यह जानकारी भी आप फेसबुक से छिपा सकते हैं। 
कैसे किया जा सकता है यह काम?
     जो जानकारियां आपने खुद शेयर की हुई हैं, उनके बारे में तो आपको पता ही है। मगर फेसबुक आपके बारे में क्या जानकारी रखती है, यह जानने के लिए आपको Ad Preferences नाम का टूल ढूंढना होगा। यह टूल ढूंढना आसान नहीं है। इसके लिए आपको आगे के स्टेप्स बड़े ध्यान से फॉलो करने होंगे।
 1. फेसबुक की न्यूज़ फीड में जाइए। राइट साइड कॉलम में दिख रहे किसी भी ऐड (विज्ञापन) के ऊपर माउस का कर्सर ले जाइए या फिर आप अपनी न्यूज़ स्ट्रीम के बीच दिख रहे किसी विज्ञापन पर जाइए और एक छोटा सा तीर (लाल घेरे में) का निशान ढूंढिए और उसपर क्लिक कीजिए।
  क्लिक करने पर आपको दिखेगा "Why am I seeing this?" इसका मतलब हुआ कि मुझे यह क्यों दिख रहा है। इस पर क्लिक करें।
 यहीं पर आपको Ad Preferences पेज का लिंक मिलेगा। Manage Your Ad Preferences पर क्लिक करें। 

क्लिक करते ही आपके सामने इस तरह की विंडो ओपन हो जाएगी। इससे एक लिस्ट आ जाएगी। हर एंट्री के नीचे आपके द्वारा लाइक की गई चीज़ें और कुछ कैटिगरीज़ होंगी। इसी से आपके दिखने वाले ऐड प्रभावित होते हैं। यहां आप फेसबुक को बता सकते हैं कि किसी खास ऐडवर्टाइज़र के ऐड्स दिखाना बंद कर दे। 
     लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं होगा कि फेसबुक आपको ऐड दिखाना ही बंद कर देगा या कम कर देगा। इससे यह बदलाव जरूर होगा कि वह आपको और ज्यादा प्रासंगिक ऐड दिखा पाएगा, जो आपके मतलब के हों।

उदाहरण के लिए मेरी प्रोफाइल में "Technology" पर क्लिक करने पर "स्मार्ट फ़ोन, वेब होस्टिंग" जैसी कई लिस्टिंग है क्योंकि मैंने इनके बारे के सर्च किया यह पढ़ा. यदि आप इनमे से किसी को डिलीट करना चाहते हैं तो क्रोस पर क्लिक कर दें.




















   लेकिन इसके बावजूद आप ऐसे ऐड देख सकते हैं। ऐसा तभी होगा, जब कोई अपने ऐड को उस शहर या लोकेशन के लिए टारगेट करे, जहां आप रहते हों।
इससे बचाव के लिए क्या करें?
       यह स्टेप काफी अहम है। फेसबुक को यह भी पता होता है कि उसकी साइट के अलावा कहीं और आप क्या करते हैं। अगर आप न्यूज़ वेबसाइट्स ज्यादा सर्फ करते हैं तो आपको न्यूज़ साइट्स के ऐड फेसबुक पर ज्यादा दिखेंगे। 
     अगर आप इसे रोकना चाहते हैं तो सबसे ऊपर ब्लू बॉर पर ताले (Lock) के आइकन (लाल घेरे में) पर क्लिक करें। See more settings पर (येलो हाईलाइट्स) क्लिक करें। 



इसमें लेफ्ट कॉलम में दिख रहे Ads पर क्लिक करें और फिर Ads based on my use of websites and apps पर जाएं। जहाँ अभी आपको क्लोज "Close" दिख रहा है क्योंकि मैंने क्लिक कर दिया है यहाँ पर आपको "Edit" लिख कर आएगा उस पर क्लिक करें और "Choose Setting" में जाकर इसे Off कर दें. 

सोमवार, 6 फ़रवरी 2017

बीएसएनएल देगा 49 रुपये में असीमित कॉल और 36 रूपये में एक जीबी डाटा

    टेलिकॉम कंपनियों की आपसी प्रतिद्वंदिता में फायदा ग्राहकों को मिल रहा है. रिलायंस जियो को  टक्कर देने के लिए वोडाफोन से लेकर एयरटेल तक ने प्लान को सस्ता कर दिया है. इस प्रतिस्पर्धा में सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार सेवाप्रदाता कंपनी बीएसएनएल भी कूद चुकी है. कंपनी की ओर से एक के बाद एक नए प्लान पेश किए जा रहे हैं जिनमें असीमित कॉल और मेसेजस के अलावा सस्ता या फ्री मोबाइल डाटा भी ग्रहकों को उपलब्ध कराया जा रहा है.
     बीएसएनएल ने लैंडलाइन से रविवार और रात्रि अवधि में की जाने वाली असीमित कॉलों का मासिक किराया 99 रुपये से घटाकर 49 रुपये कर दिया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि लैंडलाइन सेवा की ओर नए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कंपनी ने यह एक्सपीरियंस लैंडलाइन 49 प्लान पेश किया है।
        6 महीने बाद कस्टमर को एरिया के अनुसार जनरल प्लान के हिसाब से मासिक चार्ज लगेगा। सभी नए लैंडलाइन कनेक्शन के अन्तर्गत कस्टमर्स सभी ऑपरेटर्स पर सभी रविवार को 24 घंटे और बाकी दिनों में रात्रि 9 बजे से सुबह 7 बजे तक अनलिमिटेड कालिंग कर सकते हैं।
       इससे पहले बीएसएनएल ने अपनी 3-जी मोबाइल इंटरनेट दर में शुक्रवार को लगभग तीन चौथाई कटौती करने की घोषणा की थी। इस कटौती से कंपनी के 36 रुपये की कीमत में एक विशेष पैक में एक जीबी डेटा का ऑपर लोगों के लिए पेश किया है।
       कंपनी ने एक बयान में कहा है कि उसने ‘बाजार में उपलब्ध मौजूदा डेटा एसटीवी पर चार गुना अतिरिक्त डेटा की पेशकश करेन का फैसला किया है।’ इसके अनुसार 291 रुपये के प्लान में अब ग्राहक को 28 दिन की वैधता के साथ 8जीबी डेटा मिलेगा। वहीं पहले इसमें 2जीबी डेटा था। वहीं 78 रपये के प्लान में दोगुना डेटा 2जीबी मिलेगा।
        वहीं इससे पहले कंपनी ने गणतंत्र दिवस पर तीन नए प्रीपेड प्लान पेश किए थे। इसमें 26 रुपये वाला एक टैरिफ वाउचर भी शामिल था जिसमें ग्राहकों को कंपनी के नेटवर्क पर 26 घंटों के लिए मुफ्त लोकल कॉल की सुविधा दी जा रही थी।

राशन की दुकान पर भी होगा एटीएम और आधार से पेमेंट्स

        नकदी रहित लेन-देन को बढ़ावा देने में जुटी सरकार ने इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए अब सभी राशन की दुकानों को खाद डिपो पर क्रेडिट/डेबिट कार्ड के जरिये भुगतान के लिये पीओएस मशीनें के साथ-साथ आधार आधारित भुगतान की की तयारी कर ली है। 
  वित्त सचिव अशोक लवासा ने कहा कि सार्वजनिक वितरण (पीडीएस) की दुकानों पर 1.7 लाख से अधिक पीओएस मशीनें पहले ही लगायी जा चुकी हैं और अगले कुछ महीनों और लगायी जाएंगी।’ उन्होंने कहा, ‘खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग तथा उर्वरक विभाग दोनों ने सभी पीडीएस दुकानों और उर्वरक डिपों पर पीओएस मशीनें लगाने के लिये कार्यक्रम बनाये हैं।’ लवासा ने कहा, ‘साथ ही उन्हें आधार युक्त भी बनाया जाएगा।’
          राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने हर गांव में दो पीओएस मशीनें लगाने के लिये वित्तीय समावेश कोष के जरिये बैंकों को समर्थन देने की प्रतिबद्धता जतायी है। इसके तहत टायर पांच और छह क्षेत्रों के एक लाख गांवों को शामिल किया जाएगा। लागत बचत पर डिजिटल भुगतान के प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘इस प्रकार का आकलन लगाने के लिये समय काफी कम है और मुझे लगता है कि हमें लाभ का पता लगाने के लिये प्रणाली को एक साल या उसके आसपास समय देना चाहिए।’ लवासा ने कहा कि डिजिटलीकरण की दिशा में कदम उठाया जा रहा है और इसका पता इस बात से लगाया जा सकता है कि कितनी संख्या में लोगों ने भीम और यूपीआई तथा दूसरे सेवा प्रदाताओं के एप डाउनलोड किये हैं।
         वित्त सचिव के अनुसार 1.70 लाख राशन की दुकानों पर पीओएस मशीनें लगाये जाने के अलावा कई बैंक प्रतिनिधियों को पीओएस मशीनें और ‘माइक्रो एटीएम’ उपलब्ध कराये गये हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर आप पीओएस मशीन विनिर्माताओं की बात करें, इसकी काफी मांग है। बैंकों ने ही करीब 10 लाख पीओएस मशीनों के ऑर्डर दिये हैं। इसीलिए मुझे लगता है कि इन सभी से हम ऐसी स्थिति में पहुंचेंगे जहां अर्थव्यवस्था का बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण होगा।’ लवासा ने कहा कि अब रेलवे टिकट की 68 प्रतिशत बुकिंग डिजिटल तरीके से हो रही है। देश में नौ नवंबर 2016 के बाद पीओएस मशीनों की मांग बढ़ी है। पिछले दो महीने में ही 2.52 लाख पीओएस मशीनें लगायी गयी हैं।