मंगलवार, 31 जुलाई 2018

बिना कपड़ों के सोने के लिये किया जाता था मजबूर, हर रात होता था रेप, मुजफ्फरपुर बालिका गृह

बिहार के मुजुफ्फरपुर के बालिका गृह से हर रोज समाज को शर्मसार करने वाली खबरें आ रहीं हैं। जिस बालिका गृह में पुलिस अनाथ और निराश्रित बालिकाओं को आश्रय के लिये भेजती थी, उसमें उन बालिकाओं के साथ हैवानियत का ऐसा खेल खेला जाता था कि सुनकर ही किसी की भी रूह कांप जाये।
जैसे जैसे पीड़ित लड़कियां अपनी आपबीती डाॅक्टरों और मीडिया के सामने बता रहीं हैं वैसे वैसे यहां के गंदे खेल की एक एक पर्त खुलती जा रही है। बालिका गृह की कई लड़कियों ने अपने बयान में कहा कि रात को कीड़े की दवाई खिलाने के बहाने हमें नशीली दवा दे दी जाती थी, इसके बाद नशे में हमें बिना कपड़ों के सोने के लिये मजबूर किया जाता था। यही नहीं जो भी लड़की इसका विरोध करती थी उसकी बेरहमी से पिटाई भी की जाती थी।

बालिका गृह संचालक के कमरें में भेजी जातीं थी लड़कियां

विशेष पाक्सो अदालत के सामने अपनी आपबीती बयान करते हुये एक लड़की ने कहा कि बालिका गृह की आंटियां हमें रात में ब्रजेश सर के कमरे में सोने के लिये मजबूर करतीं थीं। रात में सोते समय खाने में उन्हें नशीली चीज दे दी जाती थी। इसके बाद उनके साथ क्या हुआ उन्हें होश ही नहीं रहता था। सुबह सोकर उठने पर सारे कपड़े फर्श पर बिखरे मिलते थे और पूरे शरीर में दर्द होता था

एनजीओ का प्रमुख है ब्रजेश ठाकुर

बिहार के मुजफ्फरपुर के इस बालिका गृह का संचालन एक गैर सरकारी संगठन यानी एनजीओ करता है। इस एनजीओ का संचालक ब्रजेश ठाकुर नाम का एक शख्स है। इस शख्स पर आरोप लगाते हुये यहां की एक लड़की ने कहा कि ब्रजेश उसे अक्सर अपने आॅफिस में बुलाता था और उसके निजी अंगो से छेड़खानी करता था। अदालत के सामने पीड़ित बालिका ने बताया कि वह इतनी बुरी तरह से शरीर पर खरोंचता था कि निशान पड़ जाते थे।

सभी आरोपी पुलिस हिरासत में

बालिका गृह का संचालक ब्रजेश ठाकुर अपने अन्य सहयोगियों के साथ इस समय न्यायिक हिरासत में है। वहीं पुलिस का मानना है कि पिछले पांच वर्षों के समय में इस बालिका गृह में सैकड़ों लड़कियों को लाया गया। बालिका गृह के आस पास रहने वाले लोगों ने अक्सर यहां लड़कियों के चीखने चिल्लाने की आवाजें तो सुनी पर किसी ने भी कोई जानकारी करने की कोशिष नहीं की। फिलहाल पीड़ित लड़कियों का मानसिक एवं शारीरिक उपचार किया जा रहा है, ताकि वह साधारण जिंदगी जी सकें।
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