शनिवार, 16 मई 2020

लाॅकडाउन 4.0, इन 30 जिलों में नहीं मिलेगी कोई छूट देखिये पूरी लिस्ट

लाॅकडाउन 3.0 आज समाप्त हो रहा है, इसके बाद लाॅकडाउन 4.0 प्रारम्भ होने जा रहा है, आज किसी भी समय लाॅकडाउन 4.0 के नियमों की घोषणा की जा सकती है। लेकिन इस बार के लाॅकडाउन में देश में रुके पड़े आर्थिक विकास के पहिये को घुमाने के लिये काफी कुछ किया जा रहा है, हालांकि देश के 30 जिले ऐसे हैं जिनमें लाॅकडाउन 4 में भी किसी भी तरह की छूट की कोई गुंजाइश नहीं हैं।
दरअसल यह वे 30 जिले हैं जहां देश के कुल कोरोना मरीजों के 80 फीसदी से ज्यादा मरीज है। कोरोना के कहर का सबसे अधिक सामना करने वाला राज्य महाराष्ट्र और खासकर वहां की राजधानी मुंबई तो कोरोना के कहर से बेहाल है। प्राप्त जानकारी के अनुसार केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव ने इन 30 जिलों के जिलाधिकारियों से वार्ता कर स्थिति की जानकारी ली है।
जानिये आपके राज्य के किन किन शहरों में जारी रह सकती है सख्त पाबंदी?
उत्तर प्रदेश                   :     आगरा और मेरठ
मध्य प्रदेश                    : भोपाल और इंदौर
राजस्थान                  : जयपुर, जोधपुर व उदयपुर
महाराष्ट्र                          : मुंबई, औरंगाबाद, पुणे, पालघर, सोलापुर, नासिक और ठाणे
दिल्ली                  : सम्पूर्ण दिल्ली राज्य
पंजाब                 : अमृतसर
तमिलनाडु                 : कुड्डालोर, चेंगलपट्टू, अरियालुर, विल्लुपुरम, तिरुवलूर और ग्रेटर चेन्नई
गुजरात                         : अहमदाबाद, बडोदरा और सूरत
तेलंगाना                         : ग्रेटर हैदराबाद
ओडिशा                         : बेरहमपुर
बंगाल                          : हावड़ा और कोलकाता
आंध्र प्रदेश                  : कुरनूल

सोमवार, 13 अप्रैल 2020

कल सुबह 10 बजे देश को संबोधित करेंगे पीएम मोदी, लाॅकडाउन बढ़ने के साथ ही कुछ रियायतों के हैं आसार

    कोरोनावायरस के चलते देशव्यापी लाॅकडाउन को आज 20 दिन पूरे हो गये हैं। कल लाॅकडाउन के पहले चरण के 21 दिन पूरे हो रहे हैं। ऐसे में देश के आम जनमानस के बीच यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह लाॅकडाउन का अंतिम दिन होगा, लाॅकडाउन में कुछ छूट मिलेगी या फिर और सख्ती से लाॅकडाउन को बढ़ाया जायेगा। हालांकि 11 अप्रैल को देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक से कई राज्यों में स्थिति बिल्कुल स्पष्ट हो गई है, वहां की सरकारों ने 30 अप्रैल तक लाॅकडाउन को बढ़ा दिया है ।
लेकिन कुछ राज्य ऐसे भी है जहां कोरोना का प्रसार अभी बेहद कम अथवा न के बराबर है। वहीं कुछ राज्य ऐसे भी हैं जिनके कई शहरों में अभी तक कोरोना का एक भी पाॅजिटिव मामला नहीं पाया गया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार की ओर से कोरोना प्रभावित इलाकों और इससे अप्रभावित अथवा बेहद कम प्रभावित इलाकों को अलग अलग श्रेणियों में बांटकर आम जनता को कुछ राहत दी जा सकती है। 
वहीं केन्द्र सरकार के कई मंत्रियों की ओर से कृषि, निर्माण जैसे कुछ विशेष क्षेत्रों को राहत देने की मांग भी की गई है। ताकि देश में रुके पड़े औद्यौगिक पहिये को कुछ गति दी जा सके। वहीं मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिग के माध्यम के दौरान मोदी ने ‘जान भी - जहान भी’ का फार्मूला देकर इन आंशकाओं को बल दिया है कि लाॅकडाउन 2.0 में सरकार आम जनता और उद्योगों को कुछ राहत प्रदान कर सकती है। 
हालांकि यह तो तय है कि हाल फिलहाल देश को लाॅकडाउन से मुक्त नहीं किया जा रहा है। कोरोना के दिन पर दिन बढ़ते केसों के कारण सरकार को मजबूरी में ही और सख्त रवैया अपनाने पर विवष होना पड़ रहा है। देश में कोरोना को फैलाने में तबलीगी जमात नाम के इस्लामी संगठन की भूमिका आज किसी से छिपी नहीं है, कहा तो यह भी जा रहा है कि यदि जमात ने वायरस को हवा न दी होती तो शायद आज हम कोरोना पर काफी हद तक काबू पा चुके होते।
ऐसे में पूरे देश की जिज्ञासाआंे को शांत करने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल यानी 14 अप्रैल 2020 को सुबह 10 बजे देश को संबोधित करेंगे। उनके संबोधन के दौरान आगे कोरोना से लड़ने के लिये देश की तैयारियों और लाॅकडाॅउन से जुड़ी सारी शंकाओं का समाधान संभव है।

मंगलवार, 31 मार्च 2020

क्या कोरोना वायरस को फैलाने में मुस्लिम सहायक हो रहे हैं? जानिए इस्लामिक देशों में कोरोना वायरस की स्थिति

कोरोनावायरस को लेकर इस समय पूरी दुनिया में कोहराम मचा हुआ है। अभी तक लगभग 8 लाख लोग इस जानलेवा वायरस की चपेट में आ चुके हैं। जिनमें से अकेले अमेरिका में 1.5 लाख के आसपास लोग संक्रमति हैं। वहीं इस वायरस की उत्पत्ति का केन्द्र रहा चीन काफी हद तक इस वायरस पर काबू करने का दावा कर रहा है। लम्बे लाॅकडाउन के बाद अब चीन में काफी हद तक आम जन जीवन को एक बार फिर बहाल कर दिया है। इतना ही नहीं खबरों के अनुसार वायरस पर विजय प्राप्ति के उत्साह में चीन में एक बार फिर चमगादड़ों, बत्तखों, खरगोशों को खुलेआम बेचा और खाया जाने लगा है। जबकि कोरोना वायरस के कहर के समय चीन में मांसाहार पर काफी हद तक प्रतिबंध लगा दिया गया था। 
खैर आज हम बात कर रहे हैं मुस्लिम जगत में कोरोना वायरस की स्थिति के बारे में। सबसे पहले बात करते हैं पाकिस्तान की। पाकिस्तान में अभी तक कोराना वायरस के दो हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। खस्ताहाल स्वास्थ्य सेवाओं और धार्मिक कट्टरता के चलते यहां के हालात तेजी से खराब होते जा रहे हैं। इस सबके बीच कोढ़ में खाज का काम किया है तबलीगी जमात नामक एक संगठन ने। 
दरअसल इसी महीने पाकिस्तान के लाहौर में तबलीगी जमात के एक कार्यक्रम में करीब 80 देशों के लाखों लोगों ने हिस्सा लिया था। इसी आधार पर कहा जा रहा है कि इस संगठन के जरिये कोराना का प्रसार 80 से अधिक देशोें में हुआ होगा। इसी तरह किर्गिस्तान के पांच मौलानाओं में भी कोराना पाॅजिटिव पाया गया है, जिन्हें इस्लामाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 

मलेशिया से शुरू हुआ था मौत का खेल

दरअसल तबलीगी जमात के जरिये इस जानलेवा वायरस के प्रसार का खेल मलेशिया से शुरू हुआ था। जहां फरवरी के अंतिम सप्ताह में हुये एक जलसे में 1500 विदेशियों सहित 16 हजार स्थानीय लोग भी शामिल हुये थे। यही कारण रहा कि मलेशिया में इस वायरस के कुल मामलों में से दो तिहाई के लिये इस जलसे को ही जिम्मेदार माना गया। लेकिन इस संगठन ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को नजरंदाज करते हुये इसके बाद इंडोनेशिया में भी एक जलसे का आयोजन किया जिसमें आठ हजार लोग शामिल हुये। ऐसे मंे चीन के बाद इस पृथ्वी पर कोरोना को फैलने में सबसे अधिक मदद यदि किसी ने की है तो वह तबलीगी जमात ही है।

इस्लामिक सोच का नमूना

कई बार ऐसे मामले भी सामने आये जब ऐसा देखने को मिला है कि कई लोगों के लिये इस्लामिक मान्यतायें और परंपरायें पहले हैं, भले ही कोरोना का प्रसार हो लेकिन इनकी कट्टरपंथी मान्यताओं पर कोई आंच नहीं चाहिये। इस्लामी कट्टरपन का सबसे बड़ा उदाहरण अभी हाल ही में तब देखने को मिला जब विश्व की कई मेडिकल संस्थाओं द्वारा एल्कोहल युक्त सेनिटाइजर का इस्तेमाल करने का निर्देश देने पर कई मुस्लिम समूहों द्वारा हलाल सेनिटाइजर की मांग की गई। मुस्लिमों के इस कट्टरपन के चलते मलेशिया जैसे देशों में तो कुछ कंपनियों ने उनकी मांग के अनुसार सेनिटाइजर बना कर ऊंची कीमतों पर बेचना भी शुरू कर दिया। 

कुरान से निकला है कोराना

तारिक फतेह द्वारा शाहीन बाग प्रदर्शन में एक शामिल एक महिला का वीडियो शेयर किया गया था, जिसमें महिला प्रदर्शनकारी का कहना है कि ये लोग फैला रहे हैं कि कोरोना है, लेकिन हमें पता है कि कोई कोरोना नहीं है।
कोरोना तो कुरान से ही निकला है। अल्लाह हमें कुछ नहीं होने देगा। हम डरने वाले नहीं है।
इसी तरह ईरान में धार्मिक स्थलों को जीभ से चाटने की प्रथा को जारी रखने को लेकर वहां के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि ने सभी लोगों का आवाह्न किया था, और कोरोना से न घबराने का आवाह्न किया था। यह और बात है कि यह आवाह्न करने वाले प्रतिनिध का कोरोना की वजह से कुछ दिनों बाद निधन हो गया।
लेकिन देश में फैली कट्टरता का परिणाम यह हुआ कि ईरान में कोरोना संक्रमितों की संख्या 42000 से भी अधिक निकल गई, और हजारों लोग इस वायरस के परिणामस्वरूप असमय काल के गाल में समा गये।

शनिवार, 18 जनवरी 2020

अलमारी गिरने से बच्चे की मौत पर अलमारी निर्माता कंपनी देगी 331 करोड़ का मुआवजा


अलमारी गिरने से किसी की मौत पर अलमारी बनाने वाली कंपनी को मुआवजा देना पड़े, ऐसा भारत में तो शायद ही कभी हुआ हो, लेकिन अमेरिका के कैलिफोर्निया से एक ऐसा ही दिलचस्प मामला सामने आया है। मई 2017 में जोसेफ डडेक नाम के एक दो साल के बच्चे के उपर अलमारी गिरने से उसकी मौत हो गई। अब अलमारी बनाने वाली कंपनी बच्चे के परिवार को 331 करोड़ का मुआवजा देगी।
मीडिया में आई खबरों के अनुसार जिस अलमारी के नीचे बच्चा दबा था उस अलमारी को बनाने वाली कंपनी का नाम है आइकिया। आइकिया दुनिया की प्रसिद्ध फर्नीचर कंपनी है। और इस कंपनी के द्वारा अमेरिका के इतिहास में किसी फर्नीचर कंपनी द्वारा दिया जाने वाला यह सबसे बड़ा मुआवजा है।
यह और बात है कि इस घटना से सबक लेते हुये कंपनी ने इस तरह की सभी अलमारियों को तकनीकी सुधार के लिये वापस मंगाया। वहीं बच्चे के माता पिता जोलिन और क्रेक डडेक का कहना है कि हमने कभी नहीं सोचा कि हमारे प्यारे बच्चे की जान इस तरह से अलमारी गिरने से चली जायेगी। लेकिन बाद में हमें जानकारी मिली कि अलमारी का डिजाइन ही सही नहीं था, और वह अस्थिर थी।
इसके बाद हमने कंपनी के खिलाफ केस करने और उससे मुआवजा वसूलने का निर्णय किया। डडेक दंपति का कहना है कि उन्होंने यह केस सिर्फ मुआवजे के लिये नहीं वरन इसलिये किया है कि कंपनी अपनी गलतियों को सुधारे ताकि आगे से किसी और बच्चे को इस तरह से अपनी जान गंवानी पड़े।