हमारे बारे में

    नोटबंदी के बाद से जोर-शोर से देश को कैशलैस ईकोनाॅमी बनाने की बात चली, थोड़ा मुश्किल लगा परिणामस्वरूप कैश-लैस को बदलकर लैस-कैश का लक्ष्य तय किया गया। निश्चित रूप से भारत जैसे देश में जहां की अधिकांश जनता अब भी अपने सारे कार्य नकदी के माध्यम से ही करती है मुश्किल कार्य है, लेकिन असंभव कतई नहीं।
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन मार्केट बन चुका है, 

एक अध्ययन के अनुुसार 2017 के अंत तक भारत में 314 मिलियन मोबाइल इंटरनेट यूजर्स होंगे और 2021 तक यह आंकड़ा 500 मिलियन के आसपास होगा।

       युवा पीढ़ी के साथ-साथ प्रगतिवादी बुजर्गाें को वर्तमान समय में चाव से स्मार्टफोन और इंटरनेट का प्रयोग करते देखा जा सकता है। ऐसे में जब बात आती है नकदी रहित लेन-देन की तो परिणाम उतने उत्साहजनक क्यों नहीं आते?
     इसके कई कारण हैं। जागरूकता का अभाव, क्यों? कैसे? कहां? जैसे सवाल? साथ ही सबसे बड़ा सवाल इसमें मेरा पैसा सुरक्षित तो रहेगा न?
      सबसे बडी आवश्यकता यह है कि लोगों को डिजिटल लेन-देन के फायदों, तरीकों और सुुरक्षा उपायों के बारे में उन्हीें की मातृभाषा में जागरूक किया जाये। उनकी मदद के लिये उन्हीं के बीच के युवाओं को तैयार किया जाये। 
         वर्तमान युग में जहाँ स्मार्ट फ़ोन और इन्टरनेट के माध्यम से सीखना काफी आसान हो गया है, लेकिन अभी भी ऑनलाइन सीखने के लिए ज्यादातर पाठ्य सामग्री अंग्रेजी में ही है, ऐसे में हमारी कोशिश होगी की हम IndiaEpay.com के माध्यम से कम्प्यूटर, तकनीकी टिप्स और ट्रिक्स, डिजिटल लेन-देन के तौर तरीकों, सुरक्षा उपायों, बाजार में उपलब्ध विभिन्न निजी कंपनियों के ई वाॅलेटों, विभिन्न बैंकों द्वारा जारी किये गये ई वाॅलेटों, नेट बैकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड के उपयोग आदि जैसी ढेरों जानकारी एक स्थान पर बिना किसी शुल्क के और वह भी मातृभाषा हिंदी में उपलब्ध कराएं। 
      डिजिटल लेन-देन, कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर/हार्डवेयर, एंड्रॉएड, व अन्य किसी तकनीकी विषय से संबधित से लेख, जानकारी, सफलता की कहानिया अथवा अन्य कोई ऐसी जानकारी लेख जो लोंगो के लिए उपयोगी हो आप हमें प्रकाशन हेतु भेज सकते हैं. आपके लेखों और सूचनाओं को हम www.IndiaEpay.com पर आपके फोटो व् नाम सहित प्रकाशित करेंगे।

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